गंगा के समान पूजनीय नदी को आबादी और उद्योग ने भले ही गंदा कर दिया है लेकिन इनके प्रति आस्था और श्रद्घा आज भी लोगों के मन में है। इसका कारण यह है कि भगवान श्री कृष्ण ने यमुना को माता के रुप में सम्मान दिया है।
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दूसरी ओर यमुना ने भी कृष्ण के प्रति खुद को समर्पित कर दिया। कृष्ण की भक्ति के लिए यमुना ने नदी रुप में अवतरित होना स्वीकार किया। शास्त्रों में यमुना के प्रकट होने की तिथि चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि बताई गई। यह तिथि इस वर्ष 5 अप्रैल को है।
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इस दिन यमुना की पूजा और इनके जल से तिलक करना बहुत ही पुण्यदायी माना गया है। इस दिन जो व्यक्ति यमुना की पूजा आरती करता है उसे यमलोक में जाने पर भी यमराज के कठोर दंड को भोगना नहीं पड़ता है।