मां दुर्गा की पूजा के लिए किसी समय की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन नवरात्रि का समय मां की पूजा के लिए विशेष माना गया है। नवरात्रि मनाने के पीछे का प्रकृति कारण यह माना जाता है कि इस समय मौसम परिवर्तित होता है। इसलिए जब हम नौं दिनों तक व्रत करते हैं तो शरीर को ऋतु के अनुसार ढलने का समय मिल जाता है। जो हमारे स्वास्थ के लिए अच्छा माना जाता है। जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक महत्व
नवरात्रि मनाने के विषय में दो कथाएं कथा मिलती हैं एक कथा रामनवमी से संबंधित है तो दूसरी कथा महिषासुर के वध से संबंधित है। प्रथम कथा के अनुसार महिषासुर नाम का राक्षस था जो ब्रह्मा जी का उपासक था। अपने तप के बल पर उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई मनुष्य, देवता या दानव उसका अंत न कर सके। अपने इस वरदान के कारण वह निर्दयता से तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। देवता और ऋषि-मुनि सभी उसके कृत्यों से अत्यन्त परेशान हो गए। तब सृष्टि के रचियता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और देवों के देव महादेव ने अपनी शक्तियों को एक साथ करके मां दुर्गा को उत्पन्न किया। मांदुर्गा और महिषासुर के बीच पूरे नौ दिनों तक युद्ध चला। जिसके पश्चात् मां दुर्गा ने उस राक्षस का अंत कर दिया और सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।
दूसरी कथा के अनुसार राम जी लंका पर आक्रमण करने से पहले रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे। तब उन्होंने रामेश्वरम में नौ दिनों तक मां की पूजा आराधना की। जिसके बाद राम जी ने लंका पर विजय प्राप्त की। इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत के रुप में मनाया जाता है।