दीपावली आने में अभी कुछ दिन बाकी है। लेकिन अगर आप चाहें तो दीपावली से पहले ही मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर सकते हैं। क्योंकि दीपावली से पहले एक खास रात आती है जिसे शरद पूर्णिमा की रात कहते हैं।
इस रात मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ छिटकती चांदनी में पृथ्वी भ्रमण के लिए निकलती हैं। इसलिए कहा गया है कि शरद पूर्णिमा की रात जो सोता है वह खोता है और जो जागता है वह धन संपत्ति पाता है।
शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा देवी लक्ष्मी का जन्मदिवस है। इसलिए इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस रात जल सिंघारा, बताशा, खीर, मखाना और लड्डू का भोग लगाएं।
सुंदर और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए
ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में जो भक्त भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी और उनके वाहन की पूजा करता है, देवी लक्ष्मी उन पर कृपा करती हैं।
शरद पूर्णिमा के विषय में एक मान्यता यह भी है कि कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कुमार कार्तिकेय का जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था।
इसी कारण से इसे कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में इस दिन कुमारी कन्याएं प्रातः स्नान करके सूर्य और चन्द्रमा की पूजा करती हैं। माना जाता है कि इससे योग्य पति मिलता है।
ज्योतिष की दृष्टि से भी आज की रात है खास
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार आज के दिन वृद्घि नामक योग बना हुआ है साथ सर्वार्थ सिद्घि योग भी है। यह दोनों ही योग शुभ फलदायी माने गए हैं। इन योगों में देवी लक्ष्मी की पूजा और नए काम की शुरु करना धन वृद्घि कारक माना गया है।
शास्त्रों में बताया गया है कि शरद पूर्णिमा की रात में जो व्यक्ति जागरण करके भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा और कीर्तन करता है उसकी कुण्डली में धन योग नहीं होने पर भी माता उसे धनवान बना देती हैं।
शरद पूर्णिमा की रात एक टोटका भी काफी प्रचलित है। रात में चावल या मखाने का खीर बनाकर खुले आसमान में छन्नी से ढ़ककर रख दें। सुबह इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करें। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य और धन लाभ मिलता है।