फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस तरह 'काली' से गोरे रंग वाली 'गौरी' हो गईं देवी पार्वती

विज्ञापन
विज्ञापन
आज नवरात्र का आठवां दिन है। इसलिए आज नौ दुर्गा के अष्टम रुप मां गौरी की पूजा होगी। लेकिन अष्टमी तिथि के साथ नवमी तिथि भी आज ही है इसलिए मां के नवम रुप सिद्घिदात्री की पूजा भी आज ही होगी। इसलिए नवरात्र का यह दिन बड़ा ही महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन


मां के आठवें रुप गौरी के विषय में ऐसी कथा है कि भगवान शिव को पति के रुप में पाने के लिए तपस्या करते हुए पार्वती का रंग सांवला हो गया था। एक बार भगवान शिव ने देवी पार्वती का काली कहकर उपहास किया।

देवी पार्वती इससे बहुत दुःखी हुई और भगवान शिव से कहा कि आपने मुझे काली कहा है, मैं आपको गोरी होकर दिखाऊंगी। गौर वर्ण पाने के लिए माता पार्वती तप करने वन में चली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

और काली से गौरी हो गई देवी पार्वती

तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए और पार्वती से कहा कि तुम गंगा स्नान करो, इससे तुम गौर वर्ण की हो जाओगी। देवी पार्वती ने गंगा स्नान किया और उनके शरीर से श्याम वर्ण वाली देवी कौशिकी प्रकट हुई। कौशिकी देवी ने देवताओं की पार्थना को सुनकर शुंभ और निशुंभ नामक असुरों का सेना सहित वध किया।

पार्वती अत्यंत गौर वर्ण की हो गई। महादेव ने पार्वती से कहा कि अपने उज्जवल गौर वर्ण के कारण अब संसार आपको गौरी के नाम से भी जानेगा। नवरात्र के आठवें दिन इन्हीं गौर वर्ण वाली मां गौरी देवी की पूजा होती है।

मां गौरी के इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण भी श्वेत हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। माता गौरी का ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे का बायां हाथ वर-मुद्रा में हैं।

गौरी ध्यान मंत्र
ध्यान मंत्र :- वन्दे वांछित कामार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्। सिंहारूढाचतुर्भुजामहागौरीयशस्वीनीम्॥ पुणेन्दुनिभांगौरी सोमवक्रस्थितांअष्टम दुर्गा त्रिनेत्रम। वराभीतिकरांत्रिशूल ढमरूधरांमहागौरींभजेम्॥ पटाम्बरपरिधानामृदुहास्यानानालंकारभूषिताम्। मंजीर, कार, केयूर, किंकिणिरत्न कुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांत कपोलांचैवोक्यमोहनीम्। कमनीयांलावण्यांमृणालांचंदन गन्ध लिप्ताम्॥

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें