सदियों पहले शिंगणापुर में एक चमत्कार की तरह शनि महाराज का विग्रह प्रकट हुआ था। शनि महाराज स्वयं इस जगह की रक्षा करते हैं। आइए, आज जानते हैं शनि शिंगणापुर की हैरान करने वाली बातें ।
शिंगणापुर गांव की परंपरा है कि यहां कोई भी अपने घर में ताला नहीं लगाता। इस गांव में रहने वाले धनवान लोग भी पेटी, बक्सा या अटैची में बंद करके धन नहीं रखते हैं। धन को पोटली में बांधकर निश्चिंत होकर कहीं भी रख देते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि जब भी किसी ने इस गांव में चोरी करने की कोशिश की है शनि महाराज उसे स्वयं दंड देते हैं।
यहां किसी भी घर में दरवाजे नहीं है लोगों ने सिर्फ अपनी निजता को बनाए रखने के लिए पर्दे लगा रखें हैं। शिंगणापुर में शनि महाराज का ऐसा प्रभाव है कि यहां स्थित बैंक में ताले नहीं लगते हैं।
शिंगणापुर में शनि महाराज के विग्रह के पास एक नीम का पेड़ है। कहते हैं कि जब भी इसकी शाखा विग्रह पर छाया करने लगती है तब किसी न किसी कारण से छाया करने वाली शाखा सूख अथवा टूटकर गिर जाती है। यानी माता छाया के पुत्र शनि को किसी दूसरी चीज की छाया बिल्कुल पंसद नहीं है।
शिंगणापुर स्थित शनि महाराज खुले आसमान में विराजते हैं इन्हें मंदिर की चारदीवारी में रहना पसंद नहीं है। जिस किसी ने इनका मंदिर बनाने या इन्हें छाया हेतु छत्र चढ़ाने का प्रयास किया उस पर शनि महाराज प्रसन्न होने की बजाय नाराज हो गए और उन्हें शनि के कोप का सामना करना पड़ा।
शिंगणापुर की सबसे खास बात यह है कि यहां शनि महाराज का तैलाभिषेक करने से शनि की साढेसाती, ढैय्या और दशाओं बुरे प्रभाव में कमी आती है इसलिए दुनिया भर से लोग शनिधाम में तैलाभिषेक करने आते हैं।
शनि महाराज के दूसरे मंदिरों में आपको शनि महाराज की मूर्ति के दर्शन होंगे। लेकिन शिंगणापुर एक मात्र ऐसा स्थान है जहां शनि महाराज एक विग्रह यानी एक काले पत्थर के रूप में हैं। ऐसी मान्यता है कि यह विग्रह साक्षत शनि का स्वरूप है जो अपने आप प्रकट हुआ है।
शनि शिंगणापुर में शनि की पूजा करने वाले अधोवस्त्र यानी अधे अंग पर वस्त्र धारण करते हैं। शनि महाराज को बंधन पसंद नहीं है इसलिए यहां सिले हुए वस्त्र पहनकर पूजा करने की भी परंपरा नहीं रही है जिसका पालन आज भी किया जाता है।