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क्यों किया जाता है मंगलसूत्र धारण, जानें नियम और इसका महत्व

Wed, 11 Dec 2019 06:47 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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मंगलसूत्र का पीला हिस्सा मां पार्वती का होता है और काला हिस्सा भगवान शिव का होता है
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वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक मंगलसूत्र होता है। यह सिर्फ एक काले मोतियों की माला नहीं है, यह वैवाहिक जीवन का आधार है जिसे महिलाएं अपने गले में धारण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलसूत्र धारण करने से पति की रक्षा होती है और पति के जीवन के सारे संकट कट जाते हैं। जबकि यह महिलाओं के लिए भी रक्षा कवच का काम करता है। मंगलसूत्र के अंदर बहुत सारी चीज़ें जुड़ी होती हैं और हर चीज़ का संबंध शुभता से होता है।
  • मंगलसूत्र का पीला धागा और सोना या पीतल बृहस्पति का प्रतीक होता है। इसको धारण करने से महिलाओं का बृहस्पति मजबूत होता है। 
  • काले मोतियों से महिलाएं और उनका सौभाग्य बुरी नज़र से बचे रहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले वस्तु पर किसी की भी बुरी नजर नहीं पड़ती है। मंगलसूत्र में जो काले मोती होते हैं वो महिलाओं और उनके पति दोनों की रक्षा करते हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलसूत्र का पीला हिस्सा मां पार्वती का होता है और काला हिस्सा भगवान शिव का होता है। शिव जी की कृपा से महिला और उसके पति की रक्षा होती है और मां पार्वती की कृपा से वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है।
          अब जानते हैं मंगलसूत्र धारण करने के नियम और सावधानियां क्या हैं
  • मंगलसूत्र या तो स्वयं से खरीदना चाहिए या अपने पति से लेना चाहिए। किसी अन्य से मंगलसूत्र लेना सही नहीं रहता है।
  • मंगलसूत्र धारण करने के पहले इसे मां पार्वती को अर्पित करना चाहिए।
  • जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो मंगलसूत्र को नहीं उतारना चाहिए।
 
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