शनि का नाम आते ही लोगों के हाथ पैर कांपने लगते हैं और जिन व्यक्तियों के ऊपर शनि की टेढ़ी नजर होती है उनके ऊपर तमाम तरह की विपत्तियां आती हैं, धन की हानि होने लगती है, बीमारियां और मानसिक पीड़ा का दौर आरंभ हो जाता है। 22 मई को शनि जयंती है। ऐसे में हम आज आपको शनिदेव से जुड़े रहस्य के बारे में बताएंगे कि आखिरकार शनि क्यों रखते हैं टेढ़ी नजर....
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शनिदेव जन्म कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य का विवाह प्रजापति दक्ष की कन्या संज्ञा से हुआ। संज्ञा और सूर्य से यम, मनु और यमुना पैदा हुए। सूर्येदेव का तेज उनकी पत्नी संज्ञा ज्यादा दिनों तक सह नहीं पाईं ऐसे में कुछ समय बाद संज्ञा ने अपनी छाया को सूर्य की सेवा में छोड़कर चली गईं। कुछ दिनों के बाद छाया से शनि देव का जन्म हुआ।
शनि की नजर अशुभ क्यों
कथा के अनुसार शनिदेव अपने पिता सूर्य से हमेशा नाराज रहते थे लेकिन शनिदेव भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त थे। शनिदेव का विवाह चित्ररथ नाम की कन्या से हुआ। शनिदेव भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में हमेशा लीन रहते थे और अपनी पत्नी को ज्यादा समय नहीं देते थे। एक बार शनि देव की पत्नी पुत्र प्राप्ति की इच्छा में शनिदेव के करीब आईं लेकिन शनि देव भक्ति में इतने लीन थे कि उनका उन्हें ख्याल तक नहीं आया। इसके बाद उनकी पत्नी चित्ररथ ने गुस्से में आकर शनि देव को शाप दे दिया कि जिस पर भी शनिदेव की नजर पड़ेगी वह नष्ट हो जायेगा। तभी से शनि देव की नजर जिस पर पड़ती है उसका अनिष्ट होने लगता है।
22 मई को शनि जयंती, उससे पहले जानें कहीं शनि आपकी राशि के लिए घातक तो नहीं !
कुंडली में शनि
जिन जातकों की कुंडली में शनि शुभ घर में रहते हैं उन व्यक्तियों का उनके जीवन में तरक्की और ढे़र सारी खुशियां मिलती हैं वहीं जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ होते हैं उनको कई तरह की परेशानियों का सामना करन पड़ता है।
शनि पूजा विधि
- शनि को सरसों या तिल के तेल से अभिषेक करें।
- शनि मंत्र बोलते हुए शनिदेव की पूजा करें।
- हनुमानजी की पूजा से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
- शनिदेव की कृपा पाने के लिए उनकी प्रिय वस्तुओं से उनकी पूजा जरूर करना चाहिए। तिल, उड़द, काली मिर्च, सरसों का तेल, लौंग, काला नमक और काले रंग का कपड़ा उनको प्रिय होती हैं।
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र बोलते हुए शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
- शनिवार के दिन मंदिर जाकर उनकी प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाकर उनका आशीर्वाद जरूर लें।