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जब होते हैं शनि भक्तों पर मेहरबान, पाएं शनि कृपा का वरदान

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सूर्य-चंद्र को इस सृष्टि के पिता-माता का दर्जा दिया गया है। सूर्य पिता की तरह कठोर है मगर स्वयं तपकर सबको प्रकाशित करता है। वैसे ही माता रूपी चंद्रमा को मन का कारक मानते है।
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अमावस्या का अर्थ है साथ में रहना अर्थात सूर्य-चंद्र इस दिन एक साथ कुंडली में युति बनाते हैं। जब यह अमावस्या शनिवार के दिन हो तो विशेष योग बनते हैं।

शनि को भाग्य की निर्धारण कर्ता कहा जाता है। कालपुरुष की कुंडली में यह दसवें एवं ग्यारहवें का स्वामी भी होता है। कर्म के द्वारा भाग्य का निर्माण करने में शनि का बहुत ही महत्व है।

जिसकी कुंडली में शनि की ढैया, साढ़ेसाती, नीच का शनि ,पीड़ित शनि अथवा शनि की महादशा चल रही हो, उनके लिए यह दिन कुछ ख़ास होता है।
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इस तरह शनि अमावस्या पर शनि महाराज को करें खुश

शनि अमावस्या के दिन व्रत रखने, तीर्थ स्नान या पवित्र नदी में स्नान करने और अथवा शनि की आराधना करने का विधान है। इस दिन सरसों तेल, काले तिल, कुल्थी, गुड़ और शनि यंत्र का अर्पण भी शनि प्रतिमा पर किया जाता है।

लोबान, काले तिल, सौंफ लौंग, सूरमा, खेजड़े की डंडियां, शमी के पत्ते, चावल की खील जल में डालकर स्नान करने के लिए भी कहा जाता है|

अपाहिज, बुजुर्ग, बच्चे, आश्रयहीन और जरूरतमंद व्यक्ति को निःस्वार्थ सेवा करने की कोशिश करें। आश्रितों को कभी भी कड़वे वचन न बोलें।
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