हिंदू धर्म के ज्यादातर पुराण और व्रतों की कहानियों में शिव पार्वती की कथा सुना रहे होते हैं। भगवान शिव का पत्नी के लिए प्रेम किसी तीसरे के सोचने-समझने की परवाह नहीं करता, लेकिन जब भी पत्नी को कोई चोट पहुंचती है, तब उनके क्रोध में सृष्टि को खत्म कर देने का ताप आ जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि प्रेम क्या है? इस सवाल पर महादेव ने एक ऐसा जवाब दिया जो आज भी प्रासंगिक है।
प्रेम का असली अर्थ
दरअसल, धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी पार्वती नित्य ही अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए महादेव से अलग-अलग प्रश्न पूछा करती हैं। एक दिन उन्होंने भगवान शिव से पूछा- प्रेम क्या है, प्रेम का रहस्य क्या है, इसका वास्तविक स्वरूप क्या है, इसका भविष्य भविष्य क्या है?
माता पार्वती के इस सवाल पर महादेव ने कहा, "प्रेम के बारे में तुम पूछ रही हो पार्वती? प्रेम के अनेकों रूप को तुमने ही उजागर किए हैं। तुमसे ही प्रेम की अनेक अनुभूतियां हुईं। तुम्हारे प्रश्न में ही तुम्हारा उत्तर निहित है। फिर शिव की बातें सुनकर माता पार्वती ने कहा, ”क्या इन विभिन्न अनुभूतियों की अभिव्यक्ति संभव है?” महादेव बोले, ”सती के रूप में जब तुम अपने प्राण त्याग कर दूर चली गई, मेरा जीवन, मेरा संसार, मेरा दायित्व, सब निरर्थक और निराधार हो गया। मेरे नेत्रों से अश्रुओं की धाराएं बहने लगीं।” महादेव ने कहा- अपने से दूर कर तुमने मुझे मुझ से भी दूर कर दिया था पार्वती। तुम्हारे अभाव में मेरे अधूरेपन की अति से इस सृष्टि का अपूर्ण हो जाना, यही तो प्रेम है। महादेव के अनुसार, प्रेम वह है जो सब कुछ सहन कर सकता है। प्रेम वह है जो बिना किसी शर्त के दिया जाता है। प्रेम वह है जो बिना किसी अपेक्षा के दिया जाता है।
आज के समय में प्रासंगिक
आज के समय में प्रेम का महत्व और भी बढ़ गया है। हम सभी को प्रेम की आवश्यकता है। हमें अपने परिवार, दोस्तों और समाज के लोगों से प्रेम करना चाहिए और उनसे प्रेम पाना चाहिए। महादेव कहते हैं कि तुम अपने दर्शन से साक्षात् करती हो और मैं आनंद विभोर हो नाच उठता हूं और नटराज कहलाता हूं, यही तो प्रेम है। जब तुम बार-बार स्वयं को मेरे प्रति समर्पित कर मुझे आभास कराती हो कि मैं तुम्हारे योग्य हूं, तुमने मेरी वास्तविकता को प्रतिबिंबित कर मेरे दर्पण के रूप को धारण कर लिया, यही तो प्रेम है पार्वती।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।