भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सावन मास में विशेषकर सोमवार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सरल और सहज स्वरूप शिव अपने भक्तों द्वारा अपनाए पूजा के आसान उपायों और सामग्रियों से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
सच तो यह है कि इस माह का हर दिन, हर पल, हर मनुष्य के लिए सकारात्मक फल देने वाला है। इसके अलावा शुभ ग्रहों के दोष को भी शांत करती है शिव पूजा।
खास है सावन का सोमवार
सावन सोमवार के व्रत में भगवान शिव और मां गौरी की पूजा की जाती है। जो भक्त पूरे महीने उपवास नहीं कर सकते, वे श्रावण मास के सोमवार का व्रत कर सकते हैं। सोमवार के समान ही प्रदोष व्रत का भी महत्व है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर तीसरे पहर तक किया जाता है। शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा जरूर सुनें। अगर व्रत न कर सकें, तो विधिवत मां गौरी संग शिव जी की पूजा अवश्य करें।
चंद्र भगवान शिव के नेत्र हैं, उनका दूसरा नाम सोम है। सोम ब्राह्मणों के राजा व औषधियों के देवता हैं। इसलिए सोमवार का व्रत करने से समस्त शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
श्रेष्ठ द्रव्यों से अभिषेक का महत्व
इस मास में भगवान शिव का श्रेष्ठ द्रव्यों से अभिषेक करने से अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। जैसे जल अर्पित करने से वर्षा की प्राप्ति, कुश जल से शांति, गन्ने के रस से लक्ष्मी, मधु व घी से धन की प्राप्ति, दूध से संतान सुख, जल की धारा और बेलपत्र से मन की शांति, एक हजार मंत्रों सहित घी की धारा से वंश वृद्धि एवं मृत्युंजय मंत्रों के जाप से रोगों से मुक्ति और स्वस्थ एवं सुखी जीवन की प्राप्ति होती है।
सरसों और तिल चढ़ाने से शत्रु नाश एवं रोगों से मुक्ति मिलती है। यही नहीं सावन के पहले सोमवार को शिव पूजा में भगवान शिव को कच्चे चावल चढ़ाने का भी विशेष महत्व है।
पंचाक्षरी मंत्र का जाप
सावन मास को श्रावण भी कहते हैं, जिसका अर्थ है सुनना। इसलिए यह भी कहा जाता है इस महीने में सत्संग, प्रवचन और धर्मोपदेश सुनने से विशेष फल मिलता है। इसलिए इस मास में भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र `ऊं नमः शिवाय’ का नियमित जाप, तन-मन को शुद्ध करता है।
रोजाना श्री शिव पुराण एवं शिव स्तोत्रों का विधिपूर्वक पाठ करके दूध, गंगाजल, बिल्वपत्र, फलादि, धूप, दीप से मां गौरी संग शिव की पूजा करनी चाहिए।
सामर्थ्यानुसार पंचामृत, वस्त्र, चंदन, रोली, चावल, फूल, फल, बिल्वपत्र, कमल गट्टा, पान-सुपारी, पंचमेवा एवं प्रसाद भोग लगाकर धूप-दीप जलाकर प्रेमपूर्वक शिव और मां पार्वती की आरती करने से आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है।
मंगलागौरी की पूजा
श्रावण मास में बहुत से महत्वपूर्ण व्रत भी किए जाते हैं।। सभी मंगलवार मंगलागौरी का पूजन और व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए होता है।
प्रत्येक मंगलवार को श्री मंगलागौरी का व्रत विधिपूर्वक करने से कुंवारी कन्याओं का विवाह, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति, स्वास्थ्य एवं जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि एवं ऐश्वर्य का वरदान प्राप्त होता है।