सत्य साईं बाबा 24 अप्रैल, 2011 को शरीर त्याग चुके हैं। लेकिन उनके भक्तों के कानों में साईं बाबा के कहे वे शब्द अब भी गूंजते हैं कि सत्य साईं बाबा फिर से जन्म लेकर उनके बीच आएंगे। बात 1963 की है, सत्य साईं बाबा को दिल का दौरा पड़ा। तब साईं के भक्तों ने उनके जीवन के लिए खूब प्रार्थना की। साईं बाबा जब स्वस्थ्य होकर भक्तों के बीच आए तो उन्होंने ऐलान किया कि वह इस शरीर को त्यागने के बाद फिर से जन्म लेकर उनके बीच आएंगे। अगला जन्म उनका कर्नाटक प्रदेश में होगा और उनका नाम होगा प्रेम साईं बाबा। साईं बाबा के भक्त इसी उम्मीद में बैठें हैं कि साईं बाबा उनके बीच आएंगे।
सत्य साईं बाबा ने अपने जीवनकाल में खुद को शिरडी के साईं बाबा का पुनर्जन्म के रूप में स्थापित किया। इस संदर्भ में भी एक कथा है। पहले इनका नाम सत्यनारायण राजू था और बचपन से ही इनमें कई चमत्कारी शक्तियां थीं। यह हवा में हाथ हिलाकर मिठाई एवं खाने-पीने की कई चीजें पैदा कर देते थे। इनकी बुद्घि प्रखर थी। संगीत, नृत्य, गीत, लेखन, इन सभी कलाओं में यह अव्वल थे।
14 वर्ष की उम्र में इन्हें एक दिन एक बिच्छू ने काट लिया। यह तारीख थी 8 मार्च, 1940। बिच्छू के जहर के कारण सत्यनारायण राजू कई घंटे तक बेहोश रहे। जब इन्हें होश आया उसके बाद से इनके व्यक्तित्व में काफी बदलाव आ गया। कहा जाता है कि सत्यनारायण राजू ने अपनेआप ही संस्कृत बोलना शुरू दिया जबकि संस्कृत भाषा का ज्ञान उन्हें नहीं था।
23 मई, 1940 के दिन सत्यनाराण राजू ने घर के सभी लोगों को इकट्ठा किया और कुछ चमत्कार दिखाए। इनके पिता को लगा कि सत्यनाराण के ऊपर भूत-प्रेत का साया है। पिता ने इन्हें डंडे से पीटना शुरू किया और पूछा कि तुम कौन हो। इसी समय सत्यनारायण राजू ने खुद को साईं बाबा कहा और बताया कि वह पूर्व जन्म में शिरडी के साईं बाबा थे।
धीरे-धीरे लोगों को इस घटना की जनकारी मिलती गई और सत्यनाराण राजू सत्य साईं के नाम से विख्यात हो गए। आरंभ में गुरुवार के दिन इनके घर भजन और कीर्तन के लिए लोग जुटते रहे लेकिन कुछ ही दिनों में यह सिलसिला रोजाना बढ़ता गया। सत्य साईं की चमत्कारी शक्तियों से इनके भक्तों की संख्या बढ़ती चली गई और देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित व सम्मानित लोग भी इनके भक्त बन गए। इनमें से एक नाम भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का भी है।
इन्होंने अपनी जन्मस्थली पुट्टापर्थी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी। यहां इन्होंने अस्पताल और विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया। पुट्टापर्थी में एक विशेष हवाई अड्डा भी है जहां से देश-विदेश से चार्टर्ड विमान में बैठकर इनके भक्त इनसे मिलने आते थे। पुट्टापर्थी से बाहर भी साईं बाबा ने कई जनसेवा के कार्यक्रम में योगदान दिया।