भगवान राम का जन्मदिन चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रावण के अत्याचार का अंत करने के लिए भगवान विष्णु को राम का अवतार लेना पड़ा। लेकिन राम का अवतार लेने के बाद भी भगवान राम को कई लोगों की सहायता लेनी पड़ी तक जाकर रावण का वध संभव हो पाया। रामनवमी के अवसर पर उन 9 राम भक्तों के बारे में जानिए जिनकी सहायता से राम जी ने रावण का अंत किया।
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रामनवमी विशेषः 9 लोग जिनके बिना रावण को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता
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हनुमानजी
हनुमान: राम जी की सहायता करने वालों का जब भी नाम लिया जाता है तो सबसे पहला नाम आता है हनुमान जी का। हनुमान जी ने लंका में देवी सीता की खोज की। इन्होंने राम रावण युद्ध में वानर सेना का नेतृत्व किया और बड़े-बड़े योद्धाओं का संहार किया। हनुमान जी ने रावण की सेना में दहशत पैदा की और उनका मनोबल कम किया।
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राम सु्ग्रीव
सुग्रीव: राम जी के दूसरे सहायक हैं वानरराज सुग्रीव। इन्होंने अपनी सेना के साथ रावण के विरुद्ध युद्ध लड़ने में भगवान राम की सहायता की थी। हनुमान जी इन्हीं के सेनापति थे।
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नल नील
नल-नील: सुग्रीव की सेना में दो वानर थे नल और नील जिन्हें विश्वकर्मा की संतान कहा जाता है। राम रावण युद्ध में नल और नील का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्होंने ही सागर पर पुल बनाकर पूरी सेना को सागर पार कराया था जिससे राम सेना सहित लंका पहुंच पाए।
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राम विभीषण
विभीषण: रावण के भाई विभीषण का योगदान भी कम नहीं था। इन्होंने राम को बताया कि रावण की कमजोरियां क्या है और उनकी शक्ति क्या है। इन्होंने ने ही राम को बताया रावण की नाभि में अमृत कुंड है। नाभि पर वार करने से रावण की मृत्यु हो जाएगी।
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राम सुषेण
सुषेण वैद्य: यह लंकापति रावण के चिकित्सक थे। मेघनाद के शक्ति बाण से जब लक्ष्मण अचेत हो गए तक इन्होंने ही लक्ष्मण का उपचार किया बाद में लक्ष्मण के हाथों रावण का अजेय पुत्र मेघनाद मारा गया जिससे रावण को युद्ध में स्वयं मोर्चा संभालने आना पड़ा।
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राम विश्वामित्र
ऋषि विश्वामित्र: ताड़का, मारीच और सुबह नाम के राक्षस का अंत करने के लिए ऋषि विश्वामित्र ने भगवान राम को राजा दशरथ से मांगा। आश्रम की ओर जाते समय मार्च में ताड़का नाम की राक्षसी से जब राम का सामना हुआ तो राम ने ताड़का का वध कर दिया। इससे प्रसन्न होकर महर्षि विश्वामित्र ने भगवान राम को दिव्यास्त्र का ज्ञान दिया। यह दिव्यास्त्र रावण के साथ युद्ध के समय राम के काम आए।
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राम अगस्त मुनि रामायण
महर्षि अगस्तः वनवास के दौरान जब भगवान राम दण्डकारण्य में भटक रहे थे उस समय एक दिन महर्षि अगस्त के पास पहुंचे। यहां भगवान राम को दिव्य तुनीर प्राप्त हुआ जिसमें कभी वाण खत्म नहीं होते थे। यहीं राम जी को देवासुर संग्राम में इस्तेमाल हुए दिव्यास्त्र और दिव्य धनुष प्राप्त हुए जिससे रावण का अंत हुआ।
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इंद्र
देवराज इंद्रः रावण से सबसे ज्यादा डर इंद्र को लगता था। इसलिए जब भगवान राम का इंद्र से युद्ध चल रहा था तब राम की सहायता के लिए इन्होंने अपना रथ सारथी सहित राम की सेवा में भेज दिया। इससे भगवान राम रावण के साथ मायावी युद्ध करने में सफल हुए।
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अंगद
अंगदः बालि के पुत्र अंगद का भी रावण की पराजय में बड़ा हाथ रहा है। भगवान राम ने अंगद को अपना दूत बनाकर रावण के पास भेजा था। इन्होंने रावण के दरबार में भगवान राम की शक्ति का ऐसा नजारा प्रस्तुत किया कि रावण की सेना और स्वयं रावण भी सोच में पड़ गया था कि राम के पास कैसे-कैसे महावीर हैं और इनसे कैसा युद्ध किया जाएगा। इन्होंने युद्ध के दौरान रावण की सेना के कई महारथियों को यमलोक पहुंचाया था।