मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान का महीना बहुत ही पाक और महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष रमजान का पाक महीना चांद के दीदार होते ही 13 या फिर 14 अप्रैल से आरंभ हो जाएगा। रमजान के महीने में मुस्लिम रोजे रखकर खुदा की इबादत करते हैं। इसमें सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना कुछ खाए और पीए नमाज पढ़कर खुदा को याद करते हैं। इस साल पहला रोजा 14 घंटे 8 मिनट तक रह सकता है।
रमजान का महत्व
रमजान के महीने में रोजे रखना और नमाज पढ़ना मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही खास होता है। रमजान के महीने का इंतजार सभी मुस्लिम को होता है। रमजान के महीने में रोजा करीब एक महीने तक रखा जाता है। रमजान के आखिरी दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है और एक दूसरों से गले मिलकर बधाईयां दी जाती हैं। रमजान के पूरे एक महीना में खुदा की इबादत की जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान का यह महीना नौवां महीना माना जाता है। रमजान का पवित्र महीना चांद के दिखने के बाद आरंभ होगा। जब मुसलमान रोजा रखता है तो उसके हृदय में भूखे व्यक्ति के लिए हमदर्दी पैदा होती है। रमजान में पुण्य के कामों का सबाव सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। जकात इसी महीने में अदा की जाती है। रोजा झूठ, हिंसा, बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है। कुरान में अल्लाह ने फरमाया कि रोज़ा तुम्हारे ऊपर इसलिए फर्ज़ किया है, ताकि तुम खुदा से डरने वाले बनो और खुदा से डरने का मतलब यह है कि इंसान अपने अंदर विनम्रता लाए।
रमजान की खास बातें
रमजान के पवित्र महीने में कुरान पढ़ा जाता है और अल्लाह को याद किया जाता है। रमजान के महीने में शब-ए-कद्र मनाई जाती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय रात भर जागकर इबादत करते हैं।रमजान के पाक महीने मे पांचों वक्त की नमाज अदा की जाती है।
रमजान के महीने में तीन अशरे होते है जिसमें पहला अशरा 1 से 10 दिन रहमत का अशरा का होता है।
दूसरा अशरा 11 से 20 दिन का होता है जिसमें गुनाहों की माफी का अशरा होता है।
तीसरा अशरा 21 से 30 दिन जहन्नम की आग से खुद को बचाने का अशरा होता है।
सहरी
रमजान के दिनों में सुबह के समय में जब भोजन किया जाता है तो उसे सहरी कहते हैं। सहरी दिन में सूरज के निकलने से पहले किया जाता है। सहरी करने को सुन्नत कहते हैं।
इफ्तार
दिनभर रोजा रखने के बाद शाम के समय जब सूरज डूब जाता है तब रोजा खोला जाता है इसे इफ्तार कहा जाता है।
रमजान में सहरी और इफ्तार का समय
Ramadan 2021 Sehri and Iftar Timings:
14 अप्रैल 2021- सुबह 4:13 बजे – शाम 6 : 21बजे
15 अप्रैल 2021- सुबह 4:12 बजे – शाम 6 : 21बजे
16 अप्रैल 2021- सुबह 4:11बजे – शाम 6 : 22 बजे
17 अप्रैल 2021- सुबह 4:10 बजे – शाम 6 : 22बजे
18 अप्रैल 2021- सुबह 4:09 बजे – शाम 6 : 23 बजे
19 अप्रैल 2021- सुबह 4:07 बजे – शाम 6 : 23 बजे
20 अप्रैल 2021- सुबह 4:06 बजे – शाम 6 : 24 बजे
21 अप्रैल 2021- सुबह 4:05 बजे – शाम 6 : 24 बजे
22 अप्रैल 2021- सुबह 4:04 बजे – शाम 6 : 25 बजे
23 अप्रैल 2021- सुबह 4:03 बजे – शाम 6 : 25 बजे
24 अप्रैल 2021- सुबह 4:13 बजे – शाम 6 : 21बजे
25 अप्रैल 2021- सुबह 4:01 बजे – शाम 6 : 26 बजे
26 अप्रैल 2021- सुबह 4:00 बजे – शाम 6 : 27 बजे
27 अप्रैल 2021- सुबह 3: 59 बजे – शाम 6 : 28 बजे
28 अप्रैल 2021- सुबह 3: 58 बजे – शाम 6 : 28बजे
29 अप्रैल 2021- सुबह 3: 57 बजे – शाम 6 : 29 बजे
30 अप्रैल 2021- सुबह 3 : 56 बजे – शाम 6 : 29 बजे
1 मई 2021- सुबह 3 : 55बजे – शाम 6 : 30 बजे
2 मई 2021- सुबह 3 : 54 बजे – शाम 6 : 30 बजे
3 मई 2021- सुबह 3 : 53 बजे – शाम 6 : 31 बजे
4 मई 2021- सुबह 3 : 52 बजे – शाम 6 : 31बजे
5 मई 2021- सुबह 3 : 51 बजे – शाम 6 : 32 बजे
6 मई 2021- सुबह 3 : 50 बजे – शाम 6 : 32 बजे
7 मई 2021- सुबह 3 : 49 बजे – शाम 6 : 33 बजे
8 मई 2021- सुबह 3 : 48 बजे – शाम 6 : 34 बजे
9 मई 2021- सुबह 3 : 47 बजे – शाम 6 :34 बजे
10 मई 2021- सुबह 3 : 46 बजे – शाम 6 : 35 बजे
11 मई 2021- सुबह 3 : 45 बजे – शाम 6 : 35 बजे
12 मई 2021- सुबह 3 : 44 बजे – शाम 6 : 36 बजे
13 मई 2021- सुबह 3 : 44 बजे – शाम 6 : 36 बजे