हर साल दीपावली से चार दिन पहले कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है।
इस एकादशी को रमा एकादशी एवं रंभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। चतुर्मास की अंतिम एकादशी होने के कारण इसका विशेष महत्व बताया गया है।
यह एकादशी इस वर्ष 30 नवंबर बुधवार को है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन लक्ष्मी नारायण का ध्यान करते हुए व्रत रखता है उसे अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।
व्यक्ति पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्त होकर उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करने का अधिकारी बन जाता है। इस व्रत में तुलसी की पूजा एवं भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने का बड़ा महात्म्य है।
रमा एकादशी कथा
रमा एकादशी की कथा के अनुसार प्राचीन काल में मुचुकंद नामक के राजा के दामद शोभन ने यह व्रत किया। शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण शोभन भूख प्यास सहन नहीं कर पाया और उसके प्राण छूट गए।
लेकिन व्रत के प्रभाव से शोभन को उत्तम स्थान प्राप्त हुआ हैं। रंभादि अप्सराएं शोभन की सेवा में रहने लगी।