फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सभी धर्मों के अपने हैं राम, अब तक पांच सौ रामायण हो चुकी है प्रकाशित

Fri, 23 Mar 2018 02:12 PM IST
निरंकारसिंह सेवक
विज्ञापन
विज्ञापन
मान्यता है कि प्रत्येक कल्प में राम-अवतार हुए हैं, जिनकी गाथा में भी भिन्नता रही है। यही भिन्नता कथाओं में प्रकट हुई है। शुरुआत मनुष्य सभ्यता के पहले ग्रंथ ऋग्वेद से करें, जहां राम का उल्लेख हुआ है। वेदों में प्रयुक्त शब्दों की व्याख्या कई तरह से की जाती है, इसलिए निश्चित कुछ कहा नहीं जा सकता। एक उल्लेख के अनुसार, सम्पूर्ण रामकथा संक्षेप में इस ऋचा में समाहित है-भद्रो भद्रया सचमान: आगात, स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्। सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितिष्ठन, रूशद्र्भिर्वर्णेरभि राममस्थात्॥ (ऋग्वेद 10-3-3)
विज्ञापन


अर्थ- (भद्र:) रामभद्र (भद्रया) भजनीय सीता द्वारा (सचमान:) सेवित होते हुए (आगात) वन में आए। (स्वसारम्) सीता को चुराने के लिए (जार) रावण (पश्चात्) राम और लक्ष्मण के परोक्ष में (अभ्येति) आया। रावण के मारे जाने पर (अग्नि:) अग्नि देवता (सुप्रकेतै:द्युभि) सीता के साथ (रामंअभि) राम के सामने (रूशद्भिर्वर्णे:) उद्दीप्त तेज के साथ (अस्थात्) उपस्थित हुए और असली सीता को उन्हें सौंप दिया। 

बाद में जो राम कथाएं लिखी गईं, उनमें वाल्मीकि रामायण सबसे पुरानी है। कहते हैं कि वाल्मीकि जी ने पूरा घटनाचक्र स्वयं देखा या सुना था, उसे सही माना जा सकता है। वाल्मीकि रामायण के अलावा अध्यात्म रामायण, आनंद रामायण, अद्भुत रामायण तथा तुलसीकृत रामचरित मानस आदि उल्लेखनीय हैं।
विज्ञापन


वाल्मीकि रामायण के उपरांत रामकथा में दूसरा प्राचीन ग्रंथ है ‘अध्यात्म रामायण’। वाल्मीकि में इतिहास का अधिक प्रभाव है, तो ‘अध्यात्म रामायण में राम का ईश्वरत्व उभरता है। इसे ब्रह्मांड-पुराण का उत्तर-खंड भी मानते हैं। ‘अद्भुत रामायण’ कथा-प्रसंगों और वर्णन शैली में वाकई अद्भुत है। इसमें सीता को आदिशक्ति और आदिमाया कहा है। कई अद्भुत अन्तर्कथाओं की चर्चा है। गोस्वामी तुलसीदास की ‘रामचरित मानस' लोकप्रियता में सबसे आगे है। इसने रामकथा को जन-जन में लोकप्रिय बना दिया। रामलीलाओं का मंचन भी ‘रामचरित मानस’ के बाद ही शुरु हुआ। 
 
विज्ञापन

यद्यपि मंचन के लिहाज से राधेश्याम कृत रामायण का विशेष स्थान है। नौवीं शताब्दी में तमिल कवि कम्बन की ‘कम्ब रामायण’, आन्ध्रप्रदेश में ‘रंगनाथ रामायण’ और 16वीं शताब्दी में कवयित्री मोल्डा की ‘मोल्डा रामायण’ भक्ति भाव के कारण खास जगह रखती हैं। फादर कामिल बुल्के ने नई दृष्टि से रामायण की रचना की और रामकथा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। निश्चित ही दुनिया में रामकथा पर जितने ग्रंथों की रचना हुई, उतनी रचनाएं एक कथा पर किसी भी भाषा में नहीं हुई। विश्व की विभिन्न भाषाओं में लगभग पांच सौ अलग-अलग तरह प्रकार की रामायण प्रकाशित की जा चुकी हैं।

 मुगल काल में रामायण का फारसी अनुवाद (मसीही रामायण) भी प्रकाशित हुआ था। 1623 ईस्वी में फारसी के प्रसिद्ध कवि शेख साद मसीहा ने भी ‘दास्ताने राम व सीता’ शीर्षक से रामकथा लिखी थी। उर्दू में भी राम कथा पर एक ग्रंथ रघुवंशी उर्दू रामायण वर्ष 1996 में प्रकाशित हुआ, जिसके लेखक श्री बाबू सिंह बाल्यान हैं। यह एक प्रकार का शोध ग्रंथ है, जिसमें सभी प्रकार की उपलब्ध रामकथाओं तथा उनके लेखकों का विवरण दिया गया है।

इस ग्रंथ में राम के विश्व रूप को अभिव्यक्त करते हुए कहा गया है कि राम ने ईसा मसीह, पैगम्बर मोहम्मद, गुरु नानक तथा गौतम बुद्ध के समान कोई नया मत, सम्प्रदाय या धर्म नहीं चलाया, इसलिए वे विश्वव्यापी और महान हैं। वे सभी धर्मों के अपने हैं। हिसाब लगाने बैठें तो सूची काफी लंबी हो सकती है, जो तुलसीदास के इन्हीं शब्दों को प्रमाणित करती है कि ‘रामायण सतकोटि अपारा।       
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें