मठ की वेबसाइट में उसके 70 प्रमुखों की नियुक्तियां भी समझाई गई हैं। ये मठ देश में मौजूद बाकी चार मठों के बारे में बात नहीं करता साथ ही वह उनके साथ अपने रिश्तों की जानकारी भी नहीं देता। उदाहरण के लिए, कर्नाटक के श्रींगेरी में जो मठ है, वह बताता है कि आदि शंकर का जन्म केरल के कलडी में 788 ईसा पूर्व के आसपास हुआ था। इस मठ के अनुसार आदिशंकर ने ही चार अलग-अलग दिशाओं में चार मठों की स्थापना की थी।
उन्होंने ही ओडिशा (पूर्व) में गोवर्धन मठ, कर्नाटक (दक्षिण) में श्रींगेरी मठ, द्वारका (पश्चिम) में कालिका मठ और बद्रिकाश्रम (उत्तर) में ज्योतिर्मठ की स्थापना की थी। ये चार मठ चारों वेदों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। हालांकि इन मठों के इतिहास में कहीं भी कांची मठ के बारे में जानकारी नहीं मिलती। कुछ आलोचकों का कहना है कि 1821 में तंजावूर ज़िले के कुंभकोणम में श्रींगेरी मठ की तरफ़ से एक मठ की स्थापना की गई थी।
इस मठ ने 1839 में स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू कर दिया और कुंभकोणम से निकलकर कांचीपुरम चला आया। बाद में इस मठ ने कांचीपुरम को ही अपना मुख्यालय घोषित कर दिया। कांची मठ में उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति का कोई साफ तरीका नहीं दिखाई देता। 1987 के दौरान जयेंद्र सरस्वती स्वामी ने कांची मठ छोड़ दिया था और इसके साथ ही मठ के अगले प्रमुख पर चर्चा शुरू हो गई थी।
जब एचआरसीआई ने इस मसले पर सवाल पूछा तो मठ ने कहा, "विजयेंद्र सरस्वती को जयेंद्र सरस्वती ने 1983 में ही अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया था। कांची के कामाक्षी मंदिर में पूरे विधि विधान के साथ उनकी नियुक्ति की गई"।और इस तरह विजयेंद्र सरस्वती को कांची शंकर मठ का अगला प्रमुख यानी शंकराचार्य बनने का अवसर मिला गया।