रक्षाबंधन का त्योहार बिना रक्षासूत्र यानी राखी के पूरा नहीं होता। लेकिन आपकी राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब आप मंत्रों के साथ रक्षासूत्र अपने भाई या किसी शुभ चिंतक को बांधते हैं।
रक्षासूत्र बांधने का मंत्र है -येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!! मंत्र का अर्थ इसकी कथाओं में छुपा है जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है।
विष्णु भगवान गए पाताल
वामन पुराण में एक कथा का उल्लेख किया गया है कि भगवान विष्णु ने जब राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा।
वरदान में बलि ने विष्णु भगवान को पाताल में उनके साथ निवास करने का आग्रह किया। भगवान विष्णु को वरदान के कारण पाताल में जाना पड़ा। इससे देवी लक्ष्मी को बड़ी परेशानी हुई।
राखी का मंत्र इस तरह बना
लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को वामन से मुक्त करवाने के लिए एक दिन बुजुर्ग महिला का वेष बनाकर पाताल पहुंच गई। देवी लक्ष्मी ने वामन को भाई बना लिया और एक रक्षासूत्र वामन की कलाई में बांध दी। वामन ने जब लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तो लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पातल से बैकुंठ जाने के लिए कहा।
बहन की बात रखने के लिए वामन ने भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ विदा कर दिया। भगवान विष्णु ने वामन को वरदान दिया कि चतुर्मास की अवधि में वह पाताल में आकर निवास करेंगे। इसके बाद से हर साल चार महीने भगवान विष्णु पाताल में रहते हैं।
इस घटना को स्मरण रखने के लिए ही रक्षासूत्र का मंत्र बना। इस मंत्र का अर्थ है जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न हो और दृढ़ बना रहे।
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