राखी यानी रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के स्नेह का त्योहार है। बहनें राखी बंधकर भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करती है। लेकिन इस साल राखी बंधवाते समय भद्रा का ध्यान रखना होगा अन्यथा बहनों की दुआएं काम नहीं करेंगी। राखी का त्योहार शुभ की बजाय अशुभ फलदायी भी हो सकता है।
भद्रा क्या है
ज्योतिषशास्त्र में भद्रा को अशुभ समय कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा सूर्य देव की पुत्री है। इसके बारह नाम हैं। इसका स्वभाव शनि के समान होने के कारण भद्रा के समय कोई भी शुभ काम करने पर उसका अशुभ फल प्राप्त होता है। मंगलवार के दिन भद्रा होने के कारण रक्षाबंधन के मौके पर लगने वाली भद्रा 'भद्रिका' कहलाएगी।
रक्षा बंधन का शुभ समय
रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि 20 अगस्त को 10 बजकर 22 मिनट से शुरू हो रहा है लेकिन इसके साथ ही भद्रा भी लग रहा है। 20 अगस्त को भद्रा रात में 8 बजकर 49 मिनट पर समाप्त हो जाएगा है। लेकिन रात के समय रक्षा बंधन का त्योहार नहीं मनाया जाता है। इसलिए 21 तारीख को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा।
पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त को सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इस दौरान रक्षाबंधन का त्योहार मनाना शुभ फलदायी है। अगर सुबह उठकर राखी बंधवाना कठिन लग रहा है तो कोई बात नहीं। शास्त्रों का नियम है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है वही तिथि पूरे दिन मान्य रहती है। इसलिए 21 तारीख को पूरे दिन रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।