महादेव देवों के देव कहलाते हैं। लेकिन अन्य देवी-देवताओं का प्रसाद लोग ग्रहण करते हैं और महादेव का प्रसाद ग्रहण करने से लोग हिचकते हैं। शिव जी के प्रसाद को लेकर लोगों के मन में यह भय रहता है कि प्रसाद ग्रहण करने से गरीब हो जाएंगे।
इसका कारण यह है कि शिव जी के मुख से चण्डेश्वर नाम के शिव के गण प्रकट हुए हैं। चण्डेश्वर को भूत-प्रेतों का प्रधान माना जाता है। शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का भाग होता है।
चण्डेश्वर का अंश यानी प्रसाद ग्रहण करना भूत-प्रतों का अंश खाना माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं खाना चाहिए। 'पण्डित मुरली झा' कहते हैं कि सभी शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का भाग नहीं होता है।