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Pitru Paksha 2025: श्राद्ध पक्ष में पितरों की साधना में पीपल से लेकर तुलसी तक 6 पवित्र वृक्षों का महत्व

Fri, 12 Sep 2025 01:03 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

ज्योतिष के अनुसार भी यदि कुंडली में पितृ दोष हो तो श्राद्ध पक्ष में शुभ वृक्ष लगाने से दोष की तीव्रता कम होती है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Pitru Paksha 2025: सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष को पितरों की तृप्ति और शांति का विशेष काल माना गया है। शास्त्रों में वर्णन है कि इस समय किए गए सत्कार्य, दान, तर्पण और वृक्षारोपण से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। पुराणों में वृक्षों को देवताओं का स्वरूप बताया गया है। जिस प्रकार तर्पण से पितरों की आत्मा संतुष्ट होती है, उसी प्रकार पुण्य वृक्षों का रोपण उनके लिए शाश्वत फल देने वाला कार्य माना गया है। ज्योतिष के अनुसार भी यदि कुंडली में पितृ दोष हो तो श्राद्ध पक्ष में शुभ वृक्ष लगाने से दोष की तीव्रता कम होती है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
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1. पीपल का वृक्ष
शास्त्रों में पीपल को स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप बताया गया है। विष्णु पुराण के अनुसार पीपल की पूजा करने से पितरों को स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में पीपल का वृक्ष लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। यह पितरों की आत्मा को शांति देता है और कुल में सुख-समृद्धि बनाए रखता है। ज्योतिष मान्यता है कि पीपल पितृ दोष को शांत करने का सबसे प्रभावी उपाय है।

2. बरगद का वृक्ष
बरगद को अमरत्व और वटवृक्ष के रूप में जाना जाता है। स्कंद पुराण में वर्णन है कि बरगद का वृक्ष लगाने से पितरों की आत्मा को पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध पक्ष में वटवृक्ष का रोपण कुल के पितरों को संतुष्ट करता है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद दिलाता है। यह वृक्ष दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक भी है।

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 3. बेल का वृक्ष
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बेल का वृक्ष भगवान शिव को प्रिय है और इसे पवित्र वृक्षों में गिना गया है। शिव पुराण के अनुसार बेल पत्र चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते हैं और कुल में समृद्धि आती है। श्राद्ध पक्ष में बेल का वृक्ष लगाने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वंश पर लगी बाधाएँ समाप्त होती हैं।

4. नीम का वृक्ष
 श्राद्ध पक्ष में नीम का वृक्ष लगाने से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वंशजों को स्वास्थ्य और निरोगी जीवन का वरदान मिलता है। ज्योतिष दृष्टि से यह शनि और राहु से संबंधित दोषों को कम करता है, जो अक्सर पितृ दोष के कारण बढ़ जाते हैं।

5. तुलसी का पौधा
तुलसी को सनातन धर्म में माता तुलसी के रूप में पूजनीय माना गया है। पद्म पुराण और गरुड़ पुराण में इसका महत्व वर्णित है कि तुलसी के निकट पूजा-अर्चना और दीपदान करने से पितर विशेष रूप से संतुष्ट होते हैं। श्राद्ध पक्ष में तुलसी का पौधा लगाना पितरों की आत्मा को शांति देता है और घर-परिवार पर लक्ष्मी-कृपा बनाए रखता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि तुलसी का पौधा बृहस्पति ग्रह की कृपा दिलाता है और पितृ दोष को दूर कर संतान सुख में वृद्धि करता है।

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