फाल्गुन अमावस्या को क्या करें?
पितरों का तर्पण और श्राद्ध करें
फाल्गुन अमावस्या को पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गंगा स्नान और दान करें
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के बाद गंगाजल के छींटे लगाएं । स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल, घी आदि का दान करें।
भगवान शिव और विष्णुजी की पूजा करें
फाल्गुन अमावस्या पर भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। इस दिन "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ विष्णवे नमः" मंत्रों का जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
काले तिल और दीपदान करें
इस दिन काले तिल का दान और जल में प्रवाह करने से पितृदोष का निवारण होता है। साथ ही, संध्या समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
संकल्प लें और व्रत रखें
यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और सच्चे मन से भगवान से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। इससे सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
फाल्गुन अमावस्या को क्या न करें?
मांस-मदिरा का सेवन न करें
इस पवित्र दिन पर मांस, शराब आदि का सेवन करना वर्जित माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में बाधाएं आती हैं।
किसी का अपमान न करें
इस दिन किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से पितृदोष बढ़ सकता है और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सभी के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करें।
झूठ और बुरी संगत से बचें
अमावस्या तिथि को झूठ बोलना, छल-कपट करना और बुरी संगत में पड़ना अत्यंत अशुभ माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मकता आती है।
पीपल और तुलसी के पौधे को स्पर्श न करें
इस दिन पीपल और तुलसी के पौधे को बिना स्नान किए स्पर्श करना वर्जित होता है। संध्या समय ही पीपल के नीचे दीप जलाना चाहिए।
घर में कलह न करें
इस दिन परिवार में झगड़ा, विवाद या किसी भी प्रकार की नकारात्मक चर्चा करने से घर में अशांति उत्पन्न होती है और दुर्भाग्य बढ़ता है