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हिन्दू पंचांग में पौष माह का महत्व, इस महीने जरूर करें ये कार्य

Tue, 29 Dec 2020 10:02 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पौष माह 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
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पौष माह 31 दिसंबर 2020 से शुरू हो रहा है जो 28 जनवरी 2021 को समाप्त होगा। हिन्दू पंचाग के अनुसार हर महीने की अपनी खासियत होती है और हर एक महीना किसी न किसी देवी- देवता के की खास पूजा-अर्चना के लिए होता है। पौष मास में सूर्य की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस महीने में ठंड अधिक बढ़ जाती है। आइए जानते हैं पौष मास का महत्व और व्रत के बारे में।

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भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
  • इसलिए पड़ा है पौष नाम
विक्रम संवत में पौष का महीना दसवां महीना होता है। भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। दरअसल जिस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के आधार पर रखा जाता है। पौष मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिए इस मास को पौष का मास कहा जाता है।

पौष माह में सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए। - फोटो : सोशल मीडिया
  • सूर्य देव की होती है उपासना
पौराणिक ग्रंथों की मान्यता अनुसार पौष मास में सूर्य देव की उपासना उनके भग नाम से करनी चाहिए। पौष मास के भग नाम सूर्य को ईश्वर का ही स्वरूप माना गया है। पौष मास में सूर्य को अर्ध्य देने व इनका उपवास रखने का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस मास प्रत्येक रविवार व्रत व उपवास रखने और तिल चावल की खिचड़ी का भोग लगाने से मनुष्य तेजस्वी बनता है।
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पौष माह की एकादशी तिथि - फोटो : अमर उजाला
  • इस महीने आते हैं ये प्रमुख त्योहार
पौष का पूरा महीना ही धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन कुछ प्रमुख व्रत व त्यौहार होते हैं। इस महीने दो एकादाशियां आएंगी पहली कृष्ण पक्ष को सफला एकादशी और दूसरी शुक्ल पक्ष को पुत्रदा एकादशी। पौष अमावस्या और पौष पूर्णिमा का भी बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस दिन को पितृदोष, कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिये भी इस दिन उपवास रखने के साथ-साथ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। 
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