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पापमोचिनी एकादशी आज: जानिए व्रत, पूजा विधि और प्राचीन कथा का महत्व

Sun, 15 Mar 2026 06:16 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

आज रविवार, 15 मार्च को एकादशी तिथि है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है।
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Papmochani Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज, 15 मार्च रविवार को पापमोचिनी एकादशी की तिथि है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि संसार में जन्म लेने वाला कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जिससे जाने-अनजाने में कोई न कोई पाप न हुआ हो। मनुष्य का जीवन कर्मों से संचालित होता है और इन्हीं कर्मों के कारण उसे सुख-दुख का अनुभव होता है। शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि यदि मनुष्य सच्चे मन से प्रायश्चित करें और ईश्वर की शरण ग्रहण करें तो पापों से मुक्ति संभव है। इसी उद्देश्य से सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में शांति तथा शुभ फल प्राप्त होते हैं। 

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एकादशी तिथि का आध्यात्मिक महत्व
धर्मग्रंथों में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कहा जाता है कि जब श्रद्धालु इस तिथि पर उपवास और भक्ति के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं, तब श्रीहरि प्रसन्न होकर उनके कष्टों का निवारण करते हैं। कई पुराणों में उल्लेख मिलता है कि बड़े-बड़े यज्ञ और अनुष्ठान से जो संतोष भगवान को नहीं मिलता, वह एकादशी व्रत के पालन से प्राप्त होता है। यही कारण है कि वैष्णव परंपरा में एकादशी को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है।

श्रीहरि की आराधना का महत्व
पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा होती है। एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है। पूजा के समय दीप, धूप, पुष्प, तुलसी और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। भक्तों को भगवान के समक्ष बैठकर भगवद कथा का पाठ या श्रवण करना चाहिए और दिनभर हरि स्मरण में मन लगाना चाहिए।
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व्रत के पुण्य और आध्यात्मिक फल
पापमोचिनी एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन उपवास करने और रात्रि में जागरण करने से विशेष फल प्राप्त होता है। पद्म पुराण के अनुसार जो श्रद्धालु इस व्रत को विधि-विधान से करते हैं, उनके पापों का क्षय होता है और उन्हें सहस्त्र गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी, सुरापान और गुरु पत्नी गमन जैसे गंभीर पापों का प्रायश्चित भी इस व्रत के प्रभाव से संभव माना गया है। इसलिए इसे पापों से मुक्ति देने वाला अत्यंत पुण्यमय व्रत कहा गया है।

Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचिनी एकादशी व्रत में करें इस कथा का पाठ, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति

पापमोचिनी एकादशी से जुड़ी प्राचीन कथा
पुराणों में इस एकादशी से जुड़ी एक कथा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया कि एक समय राजा मान्धाता ने लोमश ऋषि से प्रश्न किया कि मनुष्य अपने पापों से मुक्ति कैसे प्राप्त कर सकता है। इस पर लोमश ऋषि ने उन्हें एक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि चैत्ररथ नामक सुंदर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि कठोर तपस्या में लीन थे। उसी वन में एक दिन मंजुघोषा नाम की अप्सरा आई और वह ऋषि के तेजस्वी रूप को देखकर मोहित हो गई।

अप्सरा ने उन्हें आकर्षित करने का प्रयास किया और कामदेव की सहायता से वह अपने उद्देश्य में सफल हो गई। परिणामस्वरूप मेधावी ऋषि की तपस्या भंग हो गई और वे अप्सरा के साथ भोग में लिप्त हो गए। कई वर्षों के बाद जब ऋषि को अपनी भूल का बोध हुआ तो उन्हें अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने अप्सरा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया।

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व्रत के प्रभाव से मिला श्राप से उद्धार
श्राप से भयभीत होकर अप्सरा ने ऋषि के चरणों में गिरकर उनसे क्षमा मांगी और मुक्ति का उपाय पूछा। तब मेधावी ऋषि का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने उसे चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। अप्सरा ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया।

कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से वह पिशाच योनि से मुक्त हो गई और पुनः अपना दिव्य स्वरूप प्राप्त कर स्वर्ग को चली गई। दूसरी ओर, भोग में लिप्त रहने के कारण मेधावी ऋषि का जो तपोबल क्षीण हो गया था, वह भी इस व्रत के पालन से पुनः प्राप्त हो गया। इस प्रकार पापमोचिनी एकादशी का व्रत पापों का नाश करने वाला और आत्मशुद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

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