Dasha Mata Vrat 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व बताए गए हैं जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत है दशा माता व्रत। धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा अपने परिवार की सुख-समृद्धि और ग्रहों की अशुभ दशा को दूर करने के लिए किया जाता है। राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में दशा माता की पूजा अत्यंत श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है। मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा से यह व्रत करती हैं, उनके परिवार पर आने वाली विपत्तियां दूर हो जाती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इस बार दशा माता का व्रत 13 मार्च, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।
दशा माता की पूजा विधि
दशा माता व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर पूजा की तैयारी की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं पीपल के पेड़ के पास या दीवार पर दशा माता का प्रतीक बनाकर पूजा करती हैं। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर दशा माता का प्रतीक स्थापित किया जाता है। इसके बाद रोली, हल्दी, अक्षत, फूल और कच्चे सूत के धागे से माता की पूजा की जाती है। विशेष रूप से हल्दी में भिगोया हुआ दस गांठों वाला धागा माता को अर्पित किया जाता है, जिसे दशा माता का डोरा कहा जाता है। पूजा के दौरान महिलाएं दशा माता की कथा सुनती या पढ़ती हैं और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं , अंत में माता को गुड़, चना या अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है और पूजा के उपरांत धागे को गले में धारण करती हैं और दस कथाएं सुनती हैं,जिसमें नल-दमयंती की कथा प्रमुख है।
दशा माता व्रत के नियम