हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुंशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में धन, संपदा, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की तिथि, मुहूर्त और महत्व।
पापांकुशा एकादशी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 22 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक मान्य रहेगी। उदया तिथि के पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्तूबर को रखा जाएगा।
पापांकुशा एकादशी शुभ मुहूर्त 2026
इस दिन पापांकुशा एकादशी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 26 मिनट से लेकर 07 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। लाभ-उन्नति मुहुर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में पूजा का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
पापांकुशा पर भद्रा और पंचक का साया
पंचांग के अनुसार, इस साल पापांकुशा एकादशी पर भद्रा और पंचक का साया रहेगा। वहीं 21 अक्तूबर 2026 से पंचक आरंभ हो जाएगा जो 25 अक्तूबर 2026 को खत्म होगा।
पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण
हिंदू पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण 23 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 27 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 42 मिनट तक करना शुभ रहेगा।
पापांकुशा एकादशी 2026
पुराणों में पापांकुशा एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी पर व्रत रखने, पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। जो लोग पापांकुशा एकादशी पर सच्चे मन से भगवान विष्णु की उपासना करते हैं उनको पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस भगवान विष्णु के पद्यनाभ स्वरूप की पूजा करने, व्रत रखने, जप, तप, दान और पुण्य कर्म करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।