शास्त्रों में बताया गया है कि सृष्टि में 84 लाख योनियां हैं इनमें कुत्ते, बिल्ली, कीड़े-मकोड़े और हम मनुष्य भी शामिल हैं। इतना ही नहीं मृत्यु के बाद लोक और परलोक के बीच में अटकी आत्माओं की भी योनियां शामिल हैं।
लोक और परलोक के बीच जो आत्माएं ठहर जाती हैं वह भूत, प्रेतादि के रुप में भटकती रहती है और मुक्ति पाने तक विभिन्न प्रकार के कष्टो भोगती हैं।
गरुड़ पुराण, कठोपनिषद्, पद्मपुराण सहित कई अन्य पुराणों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मनुष्य किस कारण से प्रेम बनकर कष्ट भोगता है। यहां हम पद्मपुराण में बताई गई बातों का जिक्र कर रहे हैं।