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नागों के बारे में जानिए यह हैरान करने वाली बातें

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नागों को हिंदू धर्म में देवताओं का स्थान दिया गया है। नाग पंचमी के दिन लोग नागों को दूध और धान का लावा अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।
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लेकिन नागों के बारे में कुछ ऎसी बातें पुराणों में बताई गई जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

पुराणों में बताया गया है कि नागों के आठ वंश प्रमुख हैं जिनके नाम हैं अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल और कुलिक। इन नागों की अलग-अलग जातियां हैं और यह अलग-अलग दिशाओं के भी स्वामी हैं।

नाग क्रमश: आठ दिशाओं के स्वामी हैं

पुराणों में बताया गया है कि सभी नाग क्रमश: आठ दिशाओं के स्वामी हैं और इनके आयुध हैं पद्म, उत्पल, स्वास्तिक, त्रिशूल, महापद्म, शूल, छत्र और अर्धचन्द्र हैं।

नागों में अनंत और कुलिक ब्राह्मण हैं। शंख और वासुकि क्षत्रिय हैं। महापद्म और तक्षक वैश्य हैं जबकि पद्म और कर्कोटक शूद्र श्रेणी में आते हैं। नागों के पिता और माता-कश्यप और कद्रू हैं।
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शेषनाग के बारे में जानें यह बातें

इन आठों नाग वंशों में अनंत नामक नाग ही शेषनाग हैं। शेषनाग के एक हजार मुख और दो हजार जिह्वा हैं।

शेषनाग ने तपस्या करके भगवान विष्णु की सेवा का वरदान पाया। इसके बाद से शेषनाग भगवान विष्णु की शैय्या, छत्र और सिंहासन बने।

शेषनाग हमेशा भगवान विष्णु की सेवा में रहते हैं। जब कभी भगवान का अवतार होता है तब शेषनाग का अंश भी अवतार लेता है। रामावतार में लक्ष्मण और कृष्णावतार में बलदेव जी को शेषनाग का अवतार माना गया है।
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