अपने आध्यात्मिक विचारों से क्रांति लाने वाले ओशो का जन्म 11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा में हुआ था। बचपन में ओशो का नाम चंद्रमोहन था। ओशो ने अपनी शिक्षा जबलपुर में पूरी की और बाद में वे जबलपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे। आगे चलकर उन्होंने अपनी नौकरी को त्याग दिया और संन्यासी जीवन की ओर बढ़ चले। साल 1990 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।
"केवल वो लोग जो कुछ भी नहीं बनने के लिए तैयार हैं प्रेम कर सकते हैं।"
"यहां कोई भी आपका सपना पूरा करने के लिए नहीं है। हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हकीकत बनाने में लगा है।"
"अगर आप सच देखना चाहते हैं तो ना सहमती में और ना असहमति में राय रखिए।"
"कोई चुनाव मत करिए, जीवन को ऐसे अपनाइए जैसे वो अपनी समग्रता में है।"
"जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ और स्पष्ट हो जाती है।"
"जीवन ठहराव और गति के बीच का संतुलन है।"