निर्जला एकादशी के दिन क्या करें?
1. भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें
निर्जला एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है।
2. व्रत और संयम का पालन करें
इस दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि तक बिना जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करना चाहिए। व्रत के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता भी आवश्यक मानी गई है।
3. विष्णु मंत्रों का जप करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
4. दान-पुण्य अवश्य करें
निर्जला एकादशी के दिन जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, वस्त्र, फल तथा शर्बत का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को जल पिलाना भी महापुण्य का कार्य माना गया है।
5. रात्रि जागरण करें
शास्त्रों में एकादशी की रात्रि में भजन-कीर्तन, कथा श्रवण और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने का महत्व बताया गया है। इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
निर्जला एकादशी के दिन क्या नहीं करें ?
- इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज तथा अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन पूर्णतः वर्जित माना गया है। व्रत न रखने वाले लोगों को भी सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
- धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन क्रोध, झूठ, चुगली और विवाद करने से व्रत का पुण्य क्षीण हो जाता है। इसलिए शांत और सकारात्मक व्यवहार रखना चाहिए।
- गरीब, असहाय, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। इस दिन सेवा और दया का भाव विशेष महत्व रखता है।
- एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना शुभ नहीं माना जाता। यदि पूजा में तुलसी अर्पित करनी हो तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
- शास्त्रों के अनुसार एकादशी का दिन भक्ति, साधना और आत्मचिंतन के लिए होता है। इसलिए दिनभर सोना या समय व्यर्थ गंवाना उचित नहीं माना गया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।