हिंदू धर्म में हर एक महीने का अपना खास महत्व होता है। अब जल्द ही आषाढ़ का महीना शुरू होने वाला है। आषाढ़ का महीना पूजा, जप, दान करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। आषाढ़ महीने में भगवान विष्णु और भगवान शिवजी की पूजा करने के विधान होता है। इस माह में विशेष नियमों का पालन करना होता है। आषाढ़ माह में ही देवशयनी एकादशी आती है जिसमें भगवान विष्णु योगनिद्रा में चार माह रहते है, जिसे चातुर्मास कहते हैं। चातुर्मास का समय पूजा- आराधना के लिए सबसे खास माना जाता है। आइए जानते इस माह में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार।
आषाढ़ माह की एकादशी
आषाढ़ माह दो एकादशी आएगी, जिसमें से एक योगिनी एकादशी और दूसरी देवशयनी एकादशी। योगिनी एकादशी पर योगीराज भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पूजा होगी और देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा के लिए क्षीर सागर में विश्राम करें, इस दौरान चार महीनों तक किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहेगा। इन चार महीने को ही चातुर्मास कहते हैं।
आषाढ़ माह की द्वादशी तिथि कब
मासिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 11 जुलाई और वासुदेव द्वादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी।
आषाढ़ माह अमावस्या तिथि
आषाढ़ माह में अमावस्या तिथि 14 जुलाई को आएगी फिर इसके अगले दिन से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो जाएंगे।
आषाढ़ माह पूर्णिमा तिथि
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी इस माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरुओं की पूजा और उपासना और उन्हे मान-सम्मान दिया जाता है।
आषाढ़ माह 2026 के व्रत-त्योहार
30 जून आषाढ़ माह की शुरुआत
3 जुलाई संकष्टी चतुर्थी
10 जुलाई योगिनी एकादशी
12 जुलाई मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
14 जुलाई आषाढ़ अमावस्या
16 जुलाई जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति
25 जुलाई देवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी
26 जुलाई प्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 जुलाई गुरु-पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।