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Navratri 2020: कैसे बने मां के 51 शक्तिपीठ, जानिए शिव और सती की कथा

Fri, 16 Oct 2020 07:31 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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navratri 2020 मां के शक्ति पीठो की कथा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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नवरात्रि के दिनों में मां के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है। इस बार नवरात्रि 17 अक्तूबर से शुरु हो रही हैं। मां के शक्तिपीठों का बहुत महत्व माना गया है, नवरात्रि के दिनों में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। मां दुर्गा ने दुष्टों के संहार और पृथ्वी का उद्धार करने के लिए कई स्वरुप धारण किए। इन्हीं में से एक स्वरुप सती का था। जिसमें उन्होनें शिव जी से विवाह किया था। यहीं से माता सती की शक्ति बनने की कथा आरंभ होती है। जानते हैं भगवान शिव और माता सती की कथा, किस तरह हुआ मां के 51 शक्तिपीठों का निर्माण...

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पुराणों के अनुसार प्रजापति दक्ष ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक थे। इनकी दो पत्नियां थी जिनका नाम प्रसूति और वीरणी था। राजा दक्ष की पत्नी प्रसूति के गर्भ से माता सती ने जन्म लिया था। पौराणकि कथा के अनुसार माता सती शिव जी से विवाह करना चाहती थीं, परंतु राजा दक्ष इस विवाह के विरुद्ध थे। उन्हें शिव जी का रहन-सहन और वेषभूषा पसंद नहीं थी। फिर भी अपनी इच्छा के विपरीत उन्हें शिव जी से अपनी पुत्री सती का विवाह करना पड़ा। 

एक बार राजा दक्ष ने बहुत भव्य यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ नें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। लेकिन भगवान शिव और माता सती को इस यज्ञ में आमंत्रण नहीं दिया गया। माता सती बिना आमंत्रण के ही शिव जी के मना करने पर भी अपने पिता के यहां चली गईं। जब माता सती अपने पिता के यहां पहुंचीं तो प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव जी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इस तरह से अपने पति का अपमान माता सती को सहन नहीं हुआ और उन्होंने यज्ञ कुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
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जब इस बात का ज्ञात भगवान शिव को हुआ तो वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गए। तब उन्होंने वीरभद्र को वहां भेजा। वीरभद्र ने क्रोध में आकर राजा दक्ष का सिर धड़ से अलग कर दिया। जिसके बाद शिव जी माता सती का शरीर लेकर द्रवित हृदय से तांडव करने लगे। इससे सभी देवी-देवता चिंतित हो गए। तब शिव जी का मोह भंग करने के लिए विष्णु जी नें अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। माता सती के शरीर के भाग और आभूषण जिन जगहों पर गिरे, वहां शक्तिपीठ का निर्माण हुआ। इस तरह से कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है।  
 
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