हिंदू धर्म में नवरात्रि पर शक्तिपीठों के दर्शन करने का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों में शक्तिपीठों की कुल संख्या 51 बताई गई है। शास्त्रों के अनुसार जब देवी सती अपने पिता दक्ष द्वारा किये जा रहे यज्ञ में बिना बुलाए चली आईं थी। फिर वहां पर उनके पिता ने माता सती के सामने भगवान शिव के बारे में कई अपमानजनक बातें कही जिसे वह सह नही सकीं। इसके बाद देवी सती ने अग्नि कुंड में अपना शरीर त्याग दिया। सती के वियोग में भगवान शिव ने सती के शरीर को कंधे पर उठा तांडव नृत्य करना आरंभ कर दिया। तब भगवान विष्णु ने शिवजी को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र चलाकर सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। ऐसे में जहां-जहां सती के शरीर के अंग, वस्त्र और अभूषण गिरे वह स्थान शक्तिपीठ बन गए। कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठ है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित है। आज हम उत्तर भारत में स्थित कुछ शक्तिपीठों के बारे में बताने जा रहे हैं।
उत्तर भारत के शक्तिपीठ
1 कश्मीर- कश्मीर के अमरनाथ में शक्तिपीठ है जहां पर माता का कण्ठ गिरा था।
2 प्रयाग- इलाहाबाद में भी माता का शक्तिपीठ है जहां पर देवी सती की हाथ की अंगुलियां गिरी थी।
3 कात्यायनी शक्तिपीठ- इस स्थान पर माता के केश पाश गिरा था।
4 ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश- इस स्थान पर देवी सती की जीभ गिरी थी। यह स्थान कांगड़ा में स्थित है।
5 पटनेश्वरी देवी- पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को शक्तिपीठ माना जाता है। यहां माता की दाहिनी जंघा गिरी थी।