आज नवरात्र का आठवां दिन है। इस दिन की देवी महागौरी है। यह देवी नवदुर्गा का आठवां रूप मानी जाती हैं। भगवान शिव की पत्नी होने के कारण यह देवी इन्हें शिवा और शाम्भवी के नाम से जाना जाता है।
दुर्गा सप्तशती के अनुसार शुम्भ निशुम्भ नामक असुर से पराजित होकर देवता गंगा तट पर माता आदि शक्ति की प्रार्थना करते हैं। उस समय माता पार्वती गंगा में स्नान कर रही होती हैं। देवताओं की पार्थना पर माता पार्वती शुम्भ निशुम्भ के कोप से देवताओं को मुक्ति दिलाने का भरोसा देती है।
उसी समय देवी पार्वती के शरीर से देवी कौशिकी प्रकट होती हैं। देवी कौशकी शुम्भ निशुम्भ सहित उनके सेनापतियों का वध करती हैं और देवताओं को पुनः स्वर्ग पर अधिकार प्राप्त होता है।
देवी भाग्वत के अनुसार देवी की चार भुजाएं हैं और उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल शोभता है। बायीं भुजा में डमरू डम डम बज रही है और नीचे वाली भुजा से देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं।