शास्त्रों और पुराणों में बताया गया है कि कुंभ के
दौरान सभी देवी-देवता उस स्थान पर उपस्थित रहते हैं जहां कुंभ लगा होता है।
इस समय कुंभ क्षेत्र में स्नान और दान करने से कोटि-कोटि पुण्य प्राप्त
होता है और कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।
बीते साल 2013 में
इलाहाबाद में 144 साल बाद महाकुंभ लगा लगा था। इसके बाद 2015 में कुंभ का
आयोजन नासिक में होने जा रहा है। पुराणों की कथा के अनुसार सागर मंथन के
समय जब अमृत कलश प्राप्त हुआ और देवताओं एवं असुरों में अमृत को पाने के
लिए संघर्ष होना लगा तब अमृत की कुछ बूंदें छलक कर प्रयाग, हरिद्वार,
उज्जैन और नासिक में गिरा। इसलिए इन्हीं स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है।
अमृत
प्राप्ति के लिए देव-असुरों के बीच बारह दिनों तक युद्ध हुआ था। देवताओं
के बारह दिन मनुष्यों के बारह वर्ष के बराबर होते हैं। इसलिए कुंभ भी बारह
होते हैं। इनमें से चार कुंभ पृथ्वी पर होते हैं और बाकी आठ कुंभ देवलोक
में होते हैं, जिन्हें देवगण ही प्राप्त कर सकते हैं।
कुंभ शाही स्नान की शुरुआत कब से?
नासिक कुंभ मेले का प्रथम शाही स्नान 29 अगस्त 2015, द्वितीय शाही स्नान 13 सितंबर 2015, तृतीय शाही स्नान 18 सितंबर 2015 को होगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने वर्ष 2015 में नासिक (महाराष्ट्र) में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला में शाही स्नान की तिथियों की घोषणा कर दी है। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को समस्त अखाड़ों व चतुर्संप्रदायों की बैठक में नासिक कुंभ मेले में शाही स्नान की तिथियों पर फैसला लिया गया था।
ज्ञानदास ने हनुमानगढ़ी स्थित आवास पर पत्रकारों से बताया कि नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2015-16 के शाही स्नान की तिथियों व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर नासिक में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में अखिल भारतीय वैष्णव के तीनों अनी अखाड़ों से शाही स्नान की तिथि पर फैसला लिया गया। बताया कि अखाड़ों का ध्वजारोहण पर्व 19 अगस्त 2015 दिन शुक्रवार को होगा।
उन्होंने बताया कि बैठक में अखिल भारतीय निर्वाणी अनी अखाड़े के महंत धर्मदास, अखिल भारतीय निर्मोही अनी अखाड़े के महंत राजेंद्र दास, अखिल भारतीय दिगंबर अनी अखाड़े के महंत रामकृष्ण दास, खाकी अखाड़े के महंत जगन्नाथ दास सूरत, दिगंबर अखाड़े के महंत राम किशोर दास, अखिल भारतीय निर्वाणी अनी अखाड़े के महासचिव गौरीशंकर दास मौजूद रहे।