यमलोक में पापियों के लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं होती। यहां एक बार यमराज ने फैसला कर दिया तो प्रेतात्माओं को पूरा दंड भुगतना पड़ता है। यम का दंड बहुत ही कष्टकारी है। पापियों को अपने पाप के अनुसार एक नर्क के बाद दूसरे नर्क में जाकर पाप का फल भोगना पड़ता है।
गरूड़ पुराण में बताया गया है कि नर्क की कुल संख्या 84 लाख है। इनमें 21 प्रमुख नर्क हैं तामिस्र, लोहशंकु, महारौरव, शाल्मली, रौरव, कुड्मल, कालसूत्र, पूतिमृतिका, संघात, लोहितोद, सविष, संप्रतापन, महानिरय, काकोल, संजीवन, महापथ, अवीचि, अंधतामिस्र, कुंभीपाक, संप्रतापन और तपन।
जो व्यक्ति धर्म को ताक पर रखकर पूरे जीवन पाप कर्म से ही धन कमाते हैं और दूसरों को दु:ख देते हैं उन्हें युगों-युगों तक इन नर्कों में भटकना पड़ता है। इन नर्कों में लाने से पहले यमराज के दूत प्रेतात्माओं को एक वृक्ष से बांधकर लटकाते हैं औ खूब मारते हैं। पापात्मओं को यमराज के दूत ऐसे कष्ट देते हैं जिन्हें पढ़कर दिल दहल जाएगा इसलिए इनका वर्णन यहां नहीं किया जा रहा है।
अगले अंक में पढ़िए किस पाप के लिए कैसी सजा मिलती है