शास्त्रों में नागों को भी देव रूप माना गया है। जिसकी प्रकार देवताओं की पूजा होती है उसी प्रकार इनकी पूजा करने का नियम है। सभी देवताओं की तरह इनकी पूजा के लिए भी एक विशेष निर्धारित है।
भविष्य पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पूरे वर्ष चतुर्थी तिथि को व्रत रखकर पंचमी तिथि के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाता है उस पर अनंत, कर्कोटक, कुलिक, महापद्म जैसे दिव्य नाग प्रसन्न रहते हैं। ऐसे व्यक्ति के घर में किसी को भी सांप काटने का भय नहीं रहता है। सांप को धन का कारक भी माना गया है। जो लोग सर्प की पूजा करते हैं उनके घर में धन लक्ष्मी का वास होता है।
नाग पंचमी के दिन क्या करें
पुराण में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति पूरे वर्ष नाग की पूजा नहीं कर पता है तो उसे श्रावण कृष्ण एवं शुक्लपंचमी जिसे नाग पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन नागों की पूजा करनी चाहिए। सांपों की प्रसन्नता के लिए गाय के गोबर से दरवाजे पर सांप की आकृति बनाएं। इसके बाद दूध, दही, दूर्वा, पुष्प, अक्षत, कुश एवं गुग्गुल से नागों की पूजा करें। नाग पूजन के बाद पांच ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए।
इस दिन खाने में नमक का प्रयोग नहीं करें। 'ओम कुरु कुल्ले फट् स्वाहा' मंत्र का 108 बार जप करें। संभव हो तो इस मंत्र का प्रतिदिन जप करना चाहिए। जिस घर में इस मंत्र का जप किया जाता है उस घर में सांप प्रवेश नहीं करता है।
सांपों की ये बातें जानकर हैरान रह जाएंगे
श्रावण कृष्ण एवं शुक्ल पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से नागराज वासुकी प्रसन्न होकर अभय प्रदान करते हैं। घर में किसी की सांप काटने से मृत्यु नहीं होती है। अगर सांप काटने से किसी की मृत्यु हो गयी है तो उसे भी मुक्ति मिलती है।
दूध की कटोरी से नागिन हुई प्रसन्न