श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि को देश के कई भागों में नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रों में नागों में देवतओं के समान ही महत्व दिया गया है। भविष्य पुराण के अनुसार यह देवताओं और गरुड़ के सौतेले भाई हैं।
भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन जो व्यक्ति दूध और धान के लावा से नाग की पूजा करते हैं उन्हें तथा उनके परिवार के लोगों को नाग दंश का भय नहीं रहता।
तब नाग की कृपा से धन मिलता है
शास्त्रों में इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि विष को अपने मुख में धारण करने वाले नाग लक्ष्मी के समान धनवान बनाने की भी क्षमता रखते हैं।
कहते हैं जिस जमीन के नीचे नागों का बसेरा होता है उस जमीन पर अगर आप घर बनाकर रहें तो सदैव लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। ऐसे घर में रहने वाले दिनानुदिन उन्नति करते जाते हैं। इसका कारण यह भी है कि यह वास्तु दोष को दूर करता है।
नाग के इस व्यवहार से खुलते हैं किस्मत के द्वार
पुराणों में वासुकी नाग के बेटों की कथा है। इस कथा में बताया गया है कि इनके बेटों ने एक मनुष्य की कन्या को अपनी बहन बना लिया। एक बार यह कन्या नागलोक में गई। यहां इन्होंने ऐसा काम किया कि नागराज वासुकी क्रोधित हो गए और डंसने की सोचने लगे।
लेकिन इनकी पत्नी ने वासुकी को ऐसा करने से रोक लिया। लेकिन जब यह कन्या नागलोक से अपने घर वापस पृथ्वी पर आ गई तब नागराज इसे डंसने के लिए रात को आए। लेकिन नागराज की पत्नी के बताए उपाय के अनुसार उस कन्या ने मंत्र का जप किया जिससे नागराज को वापस लौट जाना पड़ा।
जाते-जाते नागराज ने अपनी पूंछ तीन बार उस घर के द्वार पर पटका। इससे घर में लक्ष्मी का वास हो गया। घर में धन संपत्ति की वृद्घि होने लगी। यानी नाग दरवाजे पर पूंछ पटके तो इसका मतलब है आप धनवान होने वाले हैं।
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