मोहिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : lord vishnu (demo pic)
मोहिनी एकादशी की कथा
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच जब समुद्र मंथन किया तो उससे अमृत कलश की प्राप्ति हुई। देवता और दानव दोनों ही पक्ष अमृत पाना चाहते थे। इसी कारण अमृत कलश की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद छिड़ गया। जब विवाद की स्थिति बढ़ने लगी और युद्ध की तरफ अग्रसर होने लगी तो इस विवाद को सुलझाने और देवताओं में अमृत वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। इस सुंदर स्त्री का रूप देखकर असुर मोहित हो उठे। इसके बाद मोहिनी रूप धारण किए हुए विष्णु जी ने देवताओं को एक कतार में और दानवों को एक कतार में बैठ जाने को कहा। इस तरह से विष्णु जी ने देवताओं को अमृतपान करवा दिया। अमृत पीकर सभी देवता अमर हो गए। मान्यता के अनुसार जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था, उस दिन वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि थी चूंकि विष्णु जी ने मोहिनी रूप धारण किया था इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है।
मोहिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एकादशी शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि आरंभ- 22 मई 2021 को दिन शनिवार सुबह 09 बजकर 15 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 23 मई 2021 को सुबह 06 बजकर 42 मिनट तक
पारणा मुहूर्त- 24 मई सुबह 05 बजकर 26 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक
पारणा अवधि- 2 घंटे 44 मिनट