श्राद्घपक्ष का एक दिन महिलाओं को समर्पित होता है। इस दिन को मातृनवमी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि परिवार में जिन महिलाओं की मृत्यु हुई है उनकी आत्मा की संतुष्टि के लिए यह तिथि उत्तम है। यह तिथि इस वर्ष 17 सितंबर को है।
इस दिन सुहागन स्त्रियों को भोजन करवाने से परिवार में मृत स्त्रियों की आत्मा तृप्त हो जाती है। पुराणों में एक रोचक विषय का उल्लेख किया गया है कि प्राण त्याग करने के बाद महिलाएं भी पुरूष रूप को धारण कर लेती हैं और पितरों में शामिल हो जाती हैं।
पितर देवताओं के समान प्रभावशाली होते हैं। कुण्डली में ग्रह नक्षत्र अनुकूल भी बैठे हों तब भी पितृगणों के नाराज होने पर ग्रह शुभ फल नहीं दे पाते हैं। जो महिलाएं मृत्यु के बाद पितर बन जाती हैं वह मातृनवमी के दिन अपने परिवार के सदस्यों के बीच आती हैं।