आज आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इसलिए आज पूर्वंचल के कई भागों में एक खास व्रत मनाया जा रहा है। इस व्रत का नाम है जीवितपुत्रिका व्रत। अपने नाम के अनुसार यह व्रत संतान की लंबी आयु और उनके ऊपर आने वाली विपदा को दूर करने वाला है।
माताएं इस दिन निराहार और निर्जल रहकर दिन और रात का व्रत रखती है। इस पीछे कारण यह है भविष्य पुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा है कि जो माताएं अपनी संतान की सलामती के लिए जीवितपुत्रिका व्रत रखती हैं उनकी संतान के जीवन पर आने वाले विपदा दूर हो जाती है और संतान का वियोग नहीं सहना पड़ता है।
भगवान शिव ने बताया है कि इस दिन के देवता जीमूतवाहन हैं। भगवान जीमूतवाहन कौन हैं और यह कैसे देवता बने इसके विषय में एक रोचक कथा है।