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माथे पर क्यों लगाया जाता है तिलक? जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Mon, 19 Aug 2024 02:33 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

भारतीय संस्कृति के लगभग हर त्योहार पर माथे पर तिलक लगाने की परंपरा चली आ रही है। माथे पर तिलक लगाने के महत्व के बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Tilak On Forehead - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार हो माथे पर तिलक लगाए बिना उस त्योहार को अधूरा माना जाता है। भारतीय संस्कृति के लगभग हर त्योहार पर माथे पर तिलक लगाने की परंपरा चली आ रही है। माथे पर तिलक लगाना सिर्फ त्योहारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी शुभ घड़ी में या मांगलिक कार्यक्रम में इसे शुभ माना जाता है। देवी-देवताओं, संत-महात्माओं और योगियों के मस्तक पर तो हमेशा तिलक सुशोभित रहता है। कोई भी परंपरा किसी न किसी कारण से बनाई जाती है, माथे पर तिलक लगाना भी उनमें से एक है। माथे पर तिलक लगाने के महत्व के बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है, खास बात ये है कि माथे पर ही नहीं इसका धार्मिक महत्व के साथ साथ वैज्ञानिक महत्व भी होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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तिलक लगाने का धार्मिक महत्व
भारतीय परंपरा में माथे पर तिलक लगाना सम्मान का सूचक भी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, माथे पर तिलक लगाने से सकारात्मकता आती है और कुंडली में मौजूद उग्र ग्रह शांत होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, चंदन का तिलक लगाने वाले का घर धन-अन्न से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है। माथे पर तिलक लगाने से जीवन में यश बढ़ता है और पापों का नाश होता है। साथ ही, जीवन से नकारात्मक्ता दूर होती है और आपके आस-पास सकारात्मकता का भाव बना रहता है। इससे मन में अच्छे विचार आते हैं और किसी भी काम को करने की क्षमता को हम कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।

हर उंगली से तिलक लगाने के अलग महत्व होते हैं-
स्कंदपुराण में अनुसार, अलग-अलग अंगुली से तिलक लगाने का फल अलग-अलग होता है। इस बात को एक श्लोक के माध्यम से समझाने की कोशिश किया है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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अनामिका शांतिदा प्रोक्ता मध्यमायुष्करी भवेत्।
अंगुष्ठः पुष्टिदः प्रोक्ता तर्जनी मोक्षदायिनी।।
अर्थात- अनामिका से तिलक करने पर शांति,मध्यमा से आयु,अंगूठे से स्वास्थ्य और तर्जनी से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
माथे की दोनों भोहों के बीच सुषुम्ना, इड़ा और पिंगला नाड़ियों के ज्ञानतंतुओं का केंद्र मस्तिष्क ही है, जो दिव्य नेत्र या तृतीय नेत्र के समान माना जाता है। ऐसे में माथे पर तिलक लगाने से आज्ञाचक्र जागृत होकर व्यक्ति की शक्ति को उर्ध्वगामी बनाता है, जिससे उसका ओज और तेज बढ़ता है। ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाते रहने से शीतलता, तरावट एवं शांति का अनुभव होता है। मन निर्मल होकर हमें सत्पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है। तिलक लगाने से विवेकशीलता और आत्मविश्वास बना रहता है। इससे सिर दर्द की पीड़ा नहीं सताती और मेधाशक्ति भी तेज होती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  
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