महाशिवरात्रि देवों के देव महादेव के आराधना के लिए काफी शुभ माना जाता है। शिव पूजा के लिए किए जाने वाले जप-तप, पूजा-पाठ आदि करने के लिए कई जरूरी नियम बताए गये हैं। इन नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
Mahashivratri Puja Niyam: आज महाशिवरात्रि का धार्मिक पर्व मनाया जाएगा। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन आने वाले इस त्योहार में भगवान भोलेनाथ की आराधना करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। मान्यता है कि इसीलिए इस पावन रात्रि पर महादेव की पूजा करने से भक्त को कई गुना अधिक लाभ होता है और हमेशा जरा सी भी अनदेखी होने पर वह रुष्ट हो जाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा के लिए किए जाने वाले जप-तप, पूजा-पाठ आदि करने के लिए कई जरूरी नियम बताए गये हैं। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पर शिव-शंभू और माता पार्वती की पूजा से जुड़े सभी जरूरी नियम के बारे में।
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महाशिवरात्रि पूजा के नियम
महाशिवरात्रि की पूजा के दौरान सबसे पहला नियम है कि पूजा में तुलसी का इस्तेमाल भूलकर भी न करें।
इसके अलावा शंख से शिवलिंग का जलाभिषेक न करें, अन्यथा दोष लगता है।
भगवान शिव की पूजा के वक्त तांबे के लोटे के अलावा किसी और धातु के लोटेक इस्तेमाल न करें। तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करना तो बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन उसी तांबे के लोटे से सिर्फ जल अर्पित करना शुभ है लेकिन दूध अर्पित नहीं करना चाहिए। शिव पूजा के दौरान इस गलती को करने से बचें।
महाशिवरात्रि की पूजा के दौरान शिवलिंग पर जो भी भोग अर्पित करते हैं उसे प्रसाद स्वरूप स्वयं ग्रहण न करें बल्कि लोगों को बांटें।
महाशिवरात्रि पर पूजा करते समय दिशा का भी ध्यान रखें। भोलेनाथ की पूजा के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की तरफ हो।
शिवलिंग पर अर्पित करने वाले बेलपत्र और शमी पत्र के वज्र हिस्से (डंठल की ओर का मोटा भाग ) को अलग कर देना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।
महाशिवरात्रि की पूजा करते समय शिवलिंग पर अभिषेक करते समय सब सामग्री पहले से अपने पास रखें और साथ ही शिव पूजा के दौरान शिवलिंग के पास घी का दीपक जलाकर रखना भी शुभ माना जाता है।