फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणेश पूजा और उत्सव के बारे में जानिए कुछ खास बातें

Sat, 06 Sep 2014 02:58 PM IST
रामस्वरूप शास्त्री
विज्ञापन
विज्ञापन
भगवान गणेश जी पिछले एक हफ्ते से पृथ्वी पर मौजूद हैं और लोग गणपति को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं। बस एक दिन बाद यानी 8 तारीख को गणेश जी अपने लोक लौट जाएंगे और गणपति के भक्त अगले एक साल तक इनके वापस आने की प्रतीक्षा करेंगे। ऐसा माना जाता है कि जिस रुप में आज गणेश उत्सव मनाया जाता है उसकी शुरुआत करने वाले लोकमान्य तिलक हैं।
विज्ञापन


पढ़ें,लव एस्ट्रोलॉजीः प्यार में आज इन्हें उठाना पड़ेगा जोखिम
इन्होंने गणपति को पूजा-पाठ और कर्मकांड से बाहर निकाल कर राष्ट्रीय एकता और जागरण का प्रतीक बना दिया। हालांकि यह उत्सव पहले से प्रचलित था पर 1893 में तिलक ने सभी धर्मो व संप्रदाय के लोगों को एकजुट कर, अन्याय के खिलाफ उठाने और सामाजिक सास्कृतिक जागृति लाने का एक बड़ा जरिया बनाया।

उत्सव में सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी होती है। दस दिन के उत्सव में आखिरी दिन अनंत चतुर्दशी (इस बार 8 सितंबर) को मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। गणपति की विदाई का उत्सव गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के उद्घोष से संपन्न होता है।
विज्ञापन


पढ़ें,भगवान को अक्षत यानी चावल क्यो अर्पित किया जाता है?

गणेशजी के जन्म को लेकर अनेक मत हैं लेकिन वह तिथि चतुर्थी ही थी, इस पर कोई विवाद नहीं है। दस दिन के उत्सव में अंनत चतुर्दशी का दिन समापन के लिए विख्यात है। चूंकि मौजूदा रूप में उत्सव का प्रचलन महाराष्ट्र लोकमान्य तिलक द्वारा हुआ, इसलिए लोकप्रियता का केंद्र भी यही इलाका है। हालांकि अब देश भर में इसे मनाया जा रहा है।
विज्ञापन

पढ़ें,रहस्यमयी मंदिर, दर्शन के लिए मजबूत कलेजा चाहिए
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें