हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। नमाज, रोजे की तरह यह भी एक प्रकार की इबादत है। यह हर उस मुसलमान पर फर्ज है जो मक्का तक आने जाने की आर्थिक व शारीरिक सामर्थ्य रखता हो।
पूरी दुनिया से हज अदा करने के लिए मुसलमान मक्का में एकत्र होते हैं। मक्का यानि केंद्र। मक्का शहर दुनिया के मध्य में स्थापित है। यही कारण है कि चारों दिशाओं के मुसलमान हाजिर हूं, ऐ अल्लाह मैं हाजिर हूं, कहते हुए उसके दरबार में पहुंचते हैं।
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हर मुसलमान एक बार इस पाक स्थल के दीदार करने की इच्छा रखता है। चालीस दिन के प्रवास में हाजी दस दिन मदीना-मुनव्वरा में गुजारते हैं। मदीना में मुहम्मद सल्लम का रोजा मुबारक है।
मक्का पहुंचकर खाना-ए-करबा की परिक्रमा करते हैं। हज की प्रक्रिया पांच दिन तक चलती है, हज के मौके पर लोग अपने-अपने वतन की सलामती और खुशहाली के लिए भी दुआ करते हैं। माना जाता है कि मांगी गई अधिकतर दुआएं कुबूल होती हैं।
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