महाभारत में मौजूद कथा के अनुसार पांडव पांच भाई थे। पांचों भाइयों की एक पत्नी थी जिसका नाम था द्रौपदी। द्रौपदी के जन्म के विषय में कथा है कि इनका जन्म अग्नि से हुआ था।
प्रौपदी वीर और गुणी स्त्री होने के साथ ही अत्यंत रूपवान थी। इसलिए जब इनके पिता द्रुपद ने द्रौपदी की शादी के लिए स्वयंवर का आयोजन किया तब भारतवर्ष के सभी राजे-राजकुमार विवाह की अभिलाषा मन में लिए पांचांल पहुंच गए।
पांडु पुत्र अर्जुन ने द्रौपदी का स्वयंवर जीता और कुंती के कहने पर द्रौपदी को पांचों पाण्डवों से विवाह करना पड़ा। द्रौपदी के पांचों पति वीर और अजेय थे। इसके बावजूद भी पांच लोग ऐसे थे जिनकी द्रौपदी पर कुदृष्टि थी।
दुर्योधन के जीजा की थी द्रौपदी पर नजर
दुर्योधन की एक बहन थी दुशाला। इसका विवाह जयद्रथ के साथ हुआ था। यह द्रौपदी के रूप पर आसक्त था और उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था।
जुए में सबकुछ हार जाने के बाद जब पाण्डव वन में दिन काट रहे थे, उस दौरान एक दिन जयद्रथ की दृष्टि द्रौपदी पर पड़ी। द्रौपदी उस समय अकेली थी। मौका देखकर जयद्रथ ने द्रौपदी का हरण कर लिया और अपने राज्य की ओर चल पड़ा।
लेकिन पाण्डवों को जयद्रथ के कुकर्म का पता लग गया और द्रौपदी को लेकर भागने का प्रयास असफल हो गया।
अज्ञातवाश के समय इसने किया द्रौपदी से दुराचार, मारा गया
अज्ञातवास के दौरान पाण्डवों ने राजा विराट के यहां शरण ली थी। राजा विराट का साला था कीचक। कीचक काफी बलवान था।
कीचक ने जब द्रौपदी को देखा तो काम पीड़ित हो गया। द्रौपदी को जब कीचक की नियत का पता चला तो उसे पाण्डवों को कीचक के बारे में बताया।
एक रात भीम द्रौपदी के वस्त्र पहनकर कीचक कमरे में गया। कीचक ने द्रौपदी समझकर जैसे ही घुंघट उठाया भीम ने उस पर हमला कर दिया और उसका वध कर दिया।
इसने की द्रौपदी को निर्वस्त्र करने का प्रयास
कौरवों ने पाण्डवों को जुआ खेलने का आमंत्रण दिया और पाण्डवों को क्षत्रिय धर्म निभाने के लिए इस आमंत्रण को स्वीकार करना पड़ा।
कौरवों ने छल से पाण्डवों को जुए में हरा दिया। जुए की बाजी में पाण्डव द्रौपदी को भी हार गए। भरी सभा में दुर्योधन के छोटे भाई दुश्शासन ने द्रौपदी का अपमान किया।
इसने दुर्योधन के कहने पर द्रौपदी का वस्त्र हरण करने का प्रयास किया। लेकिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा से द्रौपदी की लाज बच गयी और द्रौपदी का वस्त्र हरण नहीं हो सका।
जब कर्ण ने किया द्रौपदी का अपमान
दुर्योधन का मित्र और अंगराज कर्ण की भी द्रौपदी पर दृषि थी। जिस समय द्रौपदी का स्वयंवर हुआ था उस समय कर्ण भी द्रौपदी से विवाह की इच्छा से पांचाल आया था।
जब कर्ण विवाह की शर्त पूरी करने के लिए आगे बढ़ा तो क्षत्रिय नहीं होने के कारण उसे स्वयंवर में भाग लेने से रोक दिया गया।
इससे आहत हुए कर्ण ने उस समय द्रौपदी का उपमान किया जब द्रौपदी को जुए में हारने के बाद सभा में लाया गया था। कर्ण ने द्रौपदी से कहा था जो स्त्री पांच पतियों के साथ रहती है उसका मान क्या और अपमान क्या।
महाभारत का खलनायक की थी द्रौपदी पर कुदृष्टि
महाभारत का खलनायक दुर्योधन को माना जाता है। दुर्योधन ने जुए बाजी हार जाने के बाद द्रौपदी को भरी सभा में बालों को खींचकर लाने का आदेश दिया था।
इसी ने द्रौपदी को निर्वस्त्र करने की भी आज्ञा दी थी। द्रौपदी को सभा में लाए जाने के बाद दुर्योधन ने अपनी जंघा पीटकर द्रौपदी को उस पर बैठाने की बात की थी।
इसी कारण से भीम ने दुर्योधन की जंघा तोड़ने की प्रतीज्ञा की थी। महाभारत युद्घ के समाप्त होने पर भीम ने अपनी इस प्रतिज्ञा को पूरा किया।
द्रौपदी के बारे में यह पांच बातें ऐसी हैं जो आप नहीं जानते होंगे