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Magh Month 2025: माघ मास आरंभ,जानिए शास्त्रों में इसकी महिमा और स्न्नान का महत्व

Tue, 14 Jan 2025 12:40 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Magh Month 2025: माघ मास में दान को अत्यंत शुभ माना गया है। इस मास में अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से व्यक्ति के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
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माघ मास 2025: स्कंद पुराण के अनुसार माघ स्नान से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Magh Month 2025: हिंदू धर्म में माघ मास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। माघ मास में किए गए स्नान, दान और तप का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। यह मास व्यक्ति के जीवन को शुद्ध करने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है। माघ मास का स्नान कुछ इलाकों में तो सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में आते ही यानि मकर संक्रांति के दिन से शुरू होता है ,लेकिन अधिकतर स्थानों पर इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से होती है।

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तुलसीदास जी द्वारा माघ मास की महिमा
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में माघ मास की महिमा का वर्णन करते हुए इसे पवित्रता, पुण्य और मोक्ष का अद्वितीय अवसर बताया है। तुलसीदास जी कहते हैं
"माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनी। सादर मज्जहि सकल त्रिवेनी।।"


इस चौपाई में तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब माघ मास आरंभ होता है। इस समय गंगा, यमुना, और सरस्वती के संगम पर देवता, दानव, किन्नर, और मनुष्य सभी तीर्थराज प्रयाग में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में माघ मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस मास में किया गया एक छोटा सा पुण्य कर्म भी असंख्य गुना फलदायक होता है। माघ मास का स्नान विशेष रूप से मोक्षदायी माना गया है।
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माघ स्नान का महत्व
माघ मास में सूर्योदय से पहले गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसे 'माघ स्नान' कहा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार माघ स्नान से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस मास में प्रयागराज में 'माघ मेला' का आयोजन होता है, जिसे कुंभ के समान पवित्र माना गया है।

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दान और पुण्य के कार्य
माघ मास में दान को अत्यंत शुभ माना गया है। इस मास में अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से व्यक्ति के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गाय, तिल, गुड़ और कंबल का दान इस मास में विशेष पुण्य फल देता है।

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व्रत और पूजा
माघ मास में व्रत और पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और शिव की आराधना की जाती है। 'माघ पूर्णिमा' और 'एकादशी' के दिन व्रत रखने से विशेष लाभ होता है। देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस मास में 'श्रीसूक्त' और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जाता है।

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