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Navratri Spl: चौथी शक्ति को हरी इलाइची अर्पित करने में दूर होंगे रोग

Fri, 31 Mar 2017 10:29 AM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
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देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता हैं
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नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा की चौथी शक्ति देवी कूष्मांडा की पूजा होती हैं। इनकी पूजा से व्यक्ति सभी रोगों से छुटकारा मिलता है। देवी कूष्टमांडा की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता हैं। इनकी पूजा में खासतौर पर हरी इलाइची अर्पित करनी चाहिए। 
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माना जाता है कि सूर्यमंडल के अंदर के लोक में यें निवास करती हैं, क्योकि यहां पर रहने की शक्ति केवल इन्हीं के पास हैं। यह भी कहा जाता है कि इनकी शरीर की चमक भी सूर्य की तरह ही है और कोई भी देवी देवता इनकी बराबरी नहीं कर सकता।

पूजन में हरी इलाइची अर्पित करें।
ये है पूजा करने की सही विधि

- इनकी आराधना भी बाकी तीनों देवियों की आराधना जैसी ही होती हैं। इनकी पूजा करने से पहले कलश और उसमें मौजूद सभी देवी- देवताओं की आराधना करें। ध्यान रहें कि उस समय माता के परिवार में शामिल देवी- देवताओं की पूजा करना ना भूलें।

- इन सबकी पूजा के बाद मां कूष्माण्डा की पूजा करें।आराधना करते समय खासतौर पर हरे कपड़े पहनें और पूजन में हरी इलाइची, सौंफ व कुम्हड़ा अर्पित करें।
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मालपुए पसंदीदा भोग
प्रिय भोग अर्पित करने से होती हैं खुश

मां कूष्मांडा को अगर उनका प्रिय भोग अर्पित करें, तो वे अधिक प्रसन्न होती हैं। मां कूष्मांडा को मालपुए अधिक पसंद हैं। इन्हें मालपुए का भोग लगाकर प्रसाद किसी ब्राह्मण को दान में दे। 
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