Hanuman ji Bhakt ya Bhagwan:
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तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा में एक चौपाई में उल्लेख है -"भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे" अर्थात राम जी के सभी काम को हनुमान जी बनाते हैं। और यही कारण है कि भगवान राम की सहायता के लिए ही हनुमान जी का जन्म 11वें रुद्रवतार के रूप में हुआ। हनुमान जी शिव के 11वें अवतार यानी रुद्रवतार माने जाते हैं और भगवान राम विष्णुजी के 7वें अवतार हैं। पौराणिक कथाओं के आधार पर कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु राम अवतार लेकर पृथ्वीलोक पर असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर आए तब भोलेनाथ चिंतित हो गए और इसीलिए वे स्वयं भी हनुमान का अवतार लेकर उनकी सहायता के लिए धरती पर आ गए। इसलिए देखा जाए तो भगवान शिव ने अपने आराध्य विष्णु की रक्षा के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया और वो हनुमान जी के रूप में वो भगवान से राम भक्त बन गए।
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दूसरी कथा के अनुसार माता सीता ने हनुमान जी को अजर अमर होने का वरदान दिया था। जब श्रीराम ने देह त्यागने की घोषणा की तो राहनुमान जी बड़े व्यथित हो गए और माता सीता के समक्ष आकर उनसे अपना वरदान वापस लेने का आग्रह किया। हनुमान जी कि व्यथा देखकर माता सीता ने श्रीराम का ध्यान किया। श्रीराम ने जब इस अवस्था में हनुमान जी को देखा तो उन्हें गले लगाते हुए कहा, ‘ धरती पर आनेवाला कोई भी जीव या प्राणी, चाहे वह संत हो या देवता कोई भी अमर नहीं है। लेकिन हनुमान तुम्हें ये वरदान है कि जब धरती पर कोई नहीं होगा तो रामभक्तों का बेड़ा तुमको ही पार लगाना है। जब धरती पर किसी भी देवता का अवतार नहीं होगा, और पाप बढ़ेगा तब राम के भक्तों का उद्धार मेरा हनुमान ही तो करेगा। इसलिए तुमको अमरता का वरदान दिलवाया गया है हनुमान।’
उपरोक्त कथा के अनुसार श्री राम ने जब हनुमान जी को अमरता का वरदान दिलवाया तभी से रामभक्त हनुमान भगवान हो गए। हालांकि हनुमान जी हमेशा से ही रामभक्त कहलाएं हैं और इसलिए वो स्वयं रामभक्त हैं और अन्य रामभक्तों के लिए उनका उद्धार करने वाले भगवान।