प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर में विशेष पूजा की। लिंगराज मंदिर को शहर के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। कहा जाता है कि देवी पार्वती ने यहीं पर लिट्टी व वसा नाम को दो राक्षसों का वध किया गया था। भुवनेश्वर मंदिर के यह मुख्य मंदिर 1400 वर्ष से भी पुराना है।
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11 वीं शताब्दी में बना मंदिर
भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित इस मंदिर को 617-657 ई. में ललाटडुकेशरी ने बनवाया था, लेकिन इस मंदिर का जो वर्तमान स्वरूप है, वो 1090-1104 ई. में बना था। हालांकि मंदिर के कुछ हिस्से 1400 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।
बिन्दुसागर सरोवर
मंदिर के पास है बिन्दुसागर सरोवर
विशालकाय लिंगराज मंदिर के पास ही बिंदुसागर सरोवर है। ऐसी मान्यता है कि राक्षसों का वध करने के बाद देवी पार्वती को जब प्यास लगी तो भगवान शिव ने एक कूप बनाया और उसमें सभी पवित्र नदियों को बुलाया। यहां पर पूजा करने से पहले बिन्दुसरोवर में स्नान करना जरूरी होता है।
इसके बाद क्षेत्रपति अनंत वासुदेव के दर्शन किए जाते हैं। गणेश पूजा के बाद गोपालनीदेवी, शिवजी के वाहन नंदी कही पूजा के बाद ही लिंगराज के दर्शन के लिए मुख्य स्थान पर प्रवेश किया जाता है। जहां आठ फीट मोटा व करीब एक फीट ऊंचा कर ग्रेनाइट पत्थर से स्वयंभूलिंग स्थिति है।
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मंदिर का शिखर
शिखर है खास
लिंगराज मंदिर अपनी अनुपम स्थात्यकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के हर शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला देखने लायक है। यही नहीं इस मंदिर का शिखर भारतीय मंदिरों के शिखरों के विकास क्रम की शुरुआती अवस्था का शिखर माना जाता है। शिखर की ऊंचाई करीब 180 फुट है। इसमें गणेश कार्तिकेय और गौरी के तीन छोटे मंदिर भी है।
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