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जीवन के इतने रुप हो सकते हैं कभी सोचा भी नहीं होगा।

Thu, 19 Dec 2013 12:09 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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जीवन एक रहस्य, तिलस्म है, भूल-भुलैया है, एक प्रकार से एक गोरखधंधा है। जिस किसी के पास भी गंभीर पर्यवेक्षण करने की दृष्टि हो, वह उसकी तह तक पहुंच सकता है। इसी आधार पर जीवन से जुड़ी भ्रांतियों के कुहासे को भी मिटाया जा सकता है। कई प्रकार के खतरों से भी बचा जा सकता है।
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कर्तव्य के रुप में जीवन अत्यंत भारी किंतु अभिनेता की तरह हंसने-हसाने वाला हलका-फुलका रंगमंच है, जिसका विनोदपूर्ण मंचन कर आनंद लिया जा सकता है।

जीवन एक गीत है,जिसे पंचम स्वर में गाया जा सकता है। जीवन एक अवसर है, जिसे गवां देने पर सब कुछ हाथ से निकल जाता है। जीवन एक स्वप्न, जिसमें स्वयं को खोया जा सके, तो भरपूर आनंद का रसास्वादन किया जा सकता है।

जीवन एक प्रतिज्ञा है, यात्रा है, जीने की एक कला है, उसे सफल कैसे बनाया जाए, यह यदि जान लिया जाए, इस पर मनन कर लिया जाए, तो फिर उससे बड़ा भाग्यशाली कोई नहीं।
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जीवन सौंदर्य है, प्रेम है, सत्-चित्-आनंद है। वह सब कुछ है, जो नियंता की इस सृष्टि में सर्वोत्तम कहा जाने योग्य है। हम इसे जीकर तो देखें।

पुस्तक परिचय
प्रस्तुत अंश जीवन पथ के प्रदीप पुस्तक से लिया गया है जिसके लेखक डा. प्रणव पण्डया हैं। श्री वेदमाता गायत्री ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में जीवन के कई रहस्यमय और रोचक तथ्यों का वर्णन किया गया है। दर्शन और अध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी हो सकती है।

हलांकि इस पुस्तक को लिखते समय लेखक ने हिन्दी के कुछ कठिन शब्दों का प्रयोग किया है जो पाठकों को समझना होगा। वैसे दर्शन जैसे विषय को समझने के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग विषय वस्तु को गहराई देती है।
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